भारत में 30% से अधिक आबादी मोटापे से त्रस्त है ।इसमें बच्चे भी शामिल हैं बच्चे पोट बैली उदरीय ही मोटापे के शिकार हैं मेटाबॉलिक सिंड्रोम की विशेषताओं में उदरीय मोटापा, उच्च ट्राइग्लिसराइड्स ,अच्छे कोलेस्ट्रॉल की कमी, उच्च रक्तचाप और उच्च रक्त शर्करा शामिल है। इसका कारण गलत जीवनशैली है लोग ऐसे खाने को वरीयता देते हैं जिसमें ट्रांसफैट शर्करा और कोलेस्ट्रॉल स्तर अधिक होते हैं। बंद जगहों पर देर तक बैठकर काम करने की आदत और मामूली शारीरिक कसरत तथा अल्कोहल वह सिगरेट की अधिकृत के कारण मोटापा महामारी का रूप ले रहा है।
आमतौर पर जब व्यक्ति की लंबाई बढ़ने बंद हो जाती है तो उसके अधिक तरंग भी बढ़ने बंद हो जाते हैं उसके बाद हृदय जिगर और गुर्दे का वजन भी नहीं बड़ता ।इस अवस्था को उनके आरंभ की अवस्था कहते हैं। इस अवस्था के बाद सिर्फ शरीर का वजन बढ़ता है क्योंकि शरीर में वसा जमा होने लगता है ।इसलिए यौन आरंभ के बाद वसा के कारण ही वजन में वृद्धि होती है ।व्यक्ति की लंबाई एवं आयु के अनुसार वजन की एक सीमा होती है। लेकिन उससे अधिक वजन बढ़ना असामान्य होता है। पुरुषों में 20 वर्ष और महिलाओं में 18 वर्ष की आयु के बाद वजन 5 किलो से अधिक बढ़ना चाहिए ।50 वर्ष की आयु के बाद वजन बढ़ना नहीं बल्कि कम होना चाहिए।