लाइफ़ ,सेक्स और '377'

अभी हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा ने धारा 377 को पूरे देश में लागू कर दिया है जिससे जो समान लिंग (गे और लेसबियन)वाले हैं। उनके अंदर खुशी की भावना जागृत हुई है।

सेक्स के आधार पर मनुष्य को तीन भागों में बांटा गया है। लिंगी, समलिंगी एवं द्वि लिंंंगी। दोनों ही लिंगों के प्रति आकर्षित ना होने वाले जीवो को अलंगिया असेक्सुअल कहा जाता है। इतर लिंगी में विपरीत लिंग होते हैं। भारत में पारंपरिक रूप से सेक्स की अनुमति भी विवाह उपरांत ही दी जाती है। तिथि निर्धारित मुलाकात या डेटिंग के जरिए ही संगी चुनने की प्रक्रिया चलन में है। बिना किसी सामाजिक या व्यक्तिगत वचनबद्धता बनाने जैसे अपवाद भी हैं।

समलैंगिकता में समान लिंग ही सेक्स में भागी होते हैं। सेक्स के संबंध में समान लिंग को वरीयता देना ही समलैंगिक की परिभाषा मानी गई है ।हालांकि जरूरी नहीं कि समलिंगी सेक्स में सम्मिलित होने वाले मनुष्य साफ तौर पर द्वि लिंग्गी, पुरुष समलिंगी या स्त्री समलिंगी होने की घोषणा करें ।जिन पुरुषों का सेक्सुअल झुकाव दूसरे पुरुषों की ओर होता है वह पुरुष लिंगी या "गेे" कहलाते हैं ।स्त्रियों की ओर आकर्षित होने वाली स्त्रियों को समलिंगी, स्त्री समलिंगी, "लेेेसबियन" कहा जाता है।

जिंदगी अपनी है जिसको जिस प्रकार सेक्स करना हो या फिर जिधर झुकाव हो अपने तरीके से अपना सकता है। यह भारत 26 वां देश बना है जो समलिंगी सेक्स को धारण या लागू हो सका है।

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