उत्तर भारत में जुलाई सितंबर के दौरान आए साल डेंगू का प्रकोप बढ़ जाता है ।इसलिए हम सबकी जिम्मेदारी है कि हम बीमारी को फैलाने से रोकने के लिए काम करें हालांकि ऐसा करने के लिए हमें बीमारी के साथ-साथ इसे फैलाने वाले मच्छर के बारे में भी जान लेना चाहिए। डेंगू बुखार वायरस से फैलता है और वायरस फैलते हैं मच्छर से डेंगू के लक्षणों में जोड़ों और मांसपेशियों में गंभीर दर्द, सर दर्द, बुखार ,दम घुटना और ददौरे शामिल हैं क्योंकि डेंगू वायरस के कारण होता है। इसलिए इसके इलाज के लिए कोई विशेष दवाई या एंटीबायोटिक नहीं है। खास किस्म के डेंगू बुखार के लक्षणों से राहत देने के लिए इलाज किया जाता है ।
बीमारी के सबसे तेज दौर में बुखार के साथ मांस पेशियां करीब 1 या 2 सप्ताह में दम तोड़ने लगती हैं। डॉक्टरों का कहना है कि बचाव इलाज से हमेशा बेहतर होता है। डेंगू का पता चलने पर लोगों को घबराना नहीं चाहिए तथा पर्याप्त मात्रा में पानी अन्य तरल पदार्थ पीना चाहिए ।क्योंकि डेंगू के कारण शरीर में पानी की कमी हो जाती है ।अगर व्यक्ति की प्लेटलेट्स एक लाख से नीचे चली जाए तो लगातार रक्त स्राव हो रहा हो तो सिर्फ तभी प्लेटलेट चढ़ाएं। अनावश्यक प्लेटलेट चढ़वाना फायदे के बजाय नुकसानदेह हो सकता है।
इसमें सर्वाधिक तरल पदार्थ और कीवी का फल लेना चाहिए ।और अगर पपीते का पत्ता मिल जाए तो उसे पीस कर उसका रस पीना चाहिए। और बकरी का दूध इसमें फायदेमंद होता है।