1. असहयोग आंदोलन ने पूरे देश में अंग्रेजों के खिलाफ जबरदस्त असहयोग का माहौल बना दिया लेकिन 5 फरवरी 1922 को घटित हुई घटना चोरी - चौरा कांड ने इस आंदोलन को प्रभावित किया परिणाम स्वरूप महात्मा गांधी द्वारा इस आंदोलन को वापस ले लिया गया।
2. इस आंदोलन के बाद महात्मा गांधी रचनात्मक कार्य के माध्यम से लोगों में स्वाधीनता का प्रसार करने लगे ताकि अगले आंदोलन को और तीव्र बनाया जा सके, साथ ही साथ दिसंबर 1923 को बेलगाम में आयोजित कांग्रेस सम्मेलन की अध्यक्षता की। महात्मा गांधी द्वारा केवल इसी कांग्रेस सम्मेलन की अध्यक्षता की गई थी।
3. 12 मार्च 1930 को नमक कानून के खिलाफ दांडी मार्च का आरंभ किया और इसी नमक कानून के साथ सविनय अवज्ञा आंदोलन को प्रारंभ किया अर्थात विनम्र भाव से आज्ञा को ना मानना। इस प्रकार अंग्रेजों के खिलाफ असहयोग से एक कदम बढ़ते हुए अवज्ञा की ओर आंदोलन अग्रसर हुआ। आंदोलन इतना व्यापक हुआ कि वर्तमान वायसराय इर्विन को गांधी से समझौता करना पड़ा इस प्रकार 15 मार्च 1931 को गांधी इरविन समझौता संपन्न हुआ और 29 मार्च 1931को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस की ओर से भाग लेने के लिए महात्मा गांधी लंदन को रवाना हुए।
4. वर्ष 1930 ,1931 और 1932 में गोलमेज सम्मेलनों का आयोजन ब्रिटेन में किया गया जिसमें कांग्रेस ने केवल 1931 में महात्मा गांधी के रूप में शामिल हुई , तीनो गोलमेज सम्मेलन में बाबासाहेब आंबेडकर ने निम्न वर्गों के उत्थान के प्रतिनिधि के रूप में हिस्सा लिए थे।
5. द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी को अपेक्षित परिणाम न मिलने पर वह वापस भारत लौट आए और पुनः 5 दिसंबर 1931 को असहयोग आंदोलन अर्थात सविनय अवज्ञा आंदोलन को दोबारा प्रारंभ किया।
6. अंग्रेजों द्वारा महात्मा गांधी को गिरफ्तार कर लिया गया और पुणे की यरवदा जेल में रखा गया इसी जेल में वर्ष 1932 में महात्मा गांधी और बाबासाहेब आंबेडकर के बीच पूना समझौता संपन्न हुआ था यह समझौता भारत के निम्न वर्ग अर्थात हरिजन(दलित) से संबंधित था।
क्रमशः .........