1. तीनो गोलमेज सम्मेलन के पश्चात तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री द्वारा भारत के निम्न वर्ग के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किया गया इस सूचना को सुनते ही महात्मा गांधी को काफी कष्ट हुआ अतः उन्होंने इस निर्णय के खिलाफ पुणे की यरवदा जेल में अनशन पर बैठ गए इस प्रकार महात्मा गांधी और बाबा साहब अंबेडकर के बीच पूना समझौता संपन्न हुआ इस समझौते के तहत पृथक निर्वाचन मंडल को समाप्त करते हुए निम्न वर्ग के लोगों को हिंदू वर्ग में रहते हुए कुछ आरक्षित सीटों का प्रावधान किया गया अर्थात उन सीटों पर सिर्फ निम्न वर्ग का व्यक्ति ही चुनाव में खड़ा हो सकता था लेकिन वोट सभी वर्ग के लोग दे सकते थे जबकि पृथक निर्वाचन मंडल होने पर उस चुनाव क्षेत्र में उस वर्ग से ही व्यक्ति चुनाव लड़ेगा और उस वर्ग के व्यक्ति ही वोट देंगे अर्थात अन्य समुदाय या जाति के लोग वहां पर वोट नहीं डाल सकते थे। यही कारण था कि महात्मा गांधी ने पृथक निर्वाचन मंडल का विरोध किए थे।
नोट - वर्ष 1909 के एक्ट में अंग्रेजों ने मुसलमानों के लिए पृथक निर्वाचन मंडल का प्रावधान किए थे अर्थात उस क्षेत्र में मुस्लिम व्यक्ति ही चुनाव मैदान में उतरेगा और मुस्लिम व्यक्ति ही उसे वोट देंगे अन्य व्यक्ति अर्थात अन्य धर्म का व्यक्ति उसे वोट नहीं दे सकता था इस प्रकार यह व्यवस्था भारत में सांप्रदायिकता के विस्तार में वरदान साबित हुई थी।
2. इस प्रकार 8 मई 1933 को हरिजनों की स्थिति को सुधारने के लिए महात्मा गांधी ने 21 दिनों का उपवास आरंभ किया था। साथ ही महात्मा गांधी ने देश में रचनात्मक कार्यों के साथ निम्न वर्ग के सदस्यों के लिए सभी प्रकार के मानवाधिकारों के लिए देश में कई यात्राएं की।
3. इसी क्रम में वर्ष 1936 में वर्धा में सेवाग्राम आश्रम की स्थापना महात्मा गांधी द्वारा की गई।
क्रमशः .......