गॉल्जी काय (Golgi body)
.इस रचना को सबसे पहले गॉल्जी नामक वैज्ञानिक ने जंतु कोशिका में देखा था। इसलिए इसे गॉल्जी काय कहते हैं। इन्हें डिक्टियोसोम भी कहते हैं। प्रत्येक गॉल्जी काय में 4 - 10 चपटी, खोखली, लंबी मुड़ी हुई थैलियों जैसी रचनाएं होती हैं जिन्हें सिस्टरनी कहते हैं। इस सिस्टरनी के आस-पास गोल थैलियों-जैसी छोटी-छोटी रचनाएं होती हैं जिन्हें पुटिकांए कहते हैं। सिस्टरनी व पुटिकाओं को मिलाकर गॉल्जी कॉम्प्लेक्स कहते हैं।
गॉल्जी कॉम्प्लेक्स में कोशिका द्वारा संश्लेषित प्रोटीनों व अन्य पदार्थों की पुटिकाओं के रूप में पैकिंग की जाती है। ये पुटिकांए गंतव्य स्थान पर उस पदार्थ को पहुंचा देती हैं। यदि कोई पदार्थ कोशिका से बाहर स्रावित होता है तो उस पदार्थ वाली पुटिकांए उसे कोशिका कला के माध्यम से बाहर निकलवा देती है। इस प्रकार गॉल्जी काय को हम कोशिकाओं के अणुओं का यातायात-प्रबंधक भी कह सकते हैं।
लाइसोसोम - ये सूक्ष्म, गोल, इकहरी झिल्ली से घिरी थैली जैसी रचनाएं होती हैं। इनके अंदर विकर पाये जाते हैं। विकर जीवधारियों में पाए जाने वाले विशेष उत्प्रेरक होते हैं जो कि जैविक क्रियाओं की गति बढ़ाते हैं। लाइसोसोम में पाए जाने वाले विकर विघटनकारी होते हैं और विभिन्न पदार्थों का पाचन करते हैं, यहां तक कि कुछ विकर तो अपनी कोशिकाओं के कुछ कोशिकांगो का ही पाचन कर देते हैं जिसे स्वयं कोशिका ही नष्ट हो जाती है। शरीर की बेकार कोशिकाएं इसी प्रकार नष्ट होती हैं। इस कारण से लाइसोसोम को आत्महत्या का थैला भी कहते हैं।