प्रोकैरियोटी व यूकैरियोटी कोशिका -
ये प्राथमिक या अविकसित कोशिकाएं होती है। इनमें केंद्रक के चारों केंद्रक कला का अभाव होता है। इनमें क्लोरोप्लास्ट, लाइसोसोम, गाल्जीकाय एवं माइटोकॉण्ड्रिया जैसे कई प्रमुख कोशिकांग में भी नहीं पाए जाते हैं। प्रोकैरियोटी कोशिका का मूलभूत संगठन आकार व कार्य में विभिन्नता के बावजूद एक सा होता है यह दो प्रकार की होती है -
(i). यूकैरियोटी - इन कोशिकाओं में दोहरी झिल्ली के आवरण, केंद्रक आवरण से घिरा सुस्पष्ट केंद्रक पाया जाता है जिसमें DNA हिस्टोन प्रोटीन के संयुक्त होने से बनी क्रोमैटिन तथा इसके अलावा केंन्द्रिक होते हैं।
(ii). प्रोकैरियोटी - इन कोशिकाओं में हिस्टोन प्रोटीन नहीं होती जिसके कारण क्रोमैटिन नहीं बन पाती। केवल DNA का सूत्र ही गुणसूत्र के रुप में पड़ा रहता है| अन्य कोई आवरण इसे घेरे नहीं रहता। अतः केंद्रक नाम की कोई विकसित कोशिकांग इसमें नहीं होती। जीवाणुओं व नील-हरित शैवालों में ऐसी ही कोशिकाएं मिलती है।
कोशिका में कोष्ठीकरण - प्रत्येक यूकैरियोटिक कोशिका में केंद्रक, माइटोकॉण्ड्रिया, गॉल्जी बॉडी, लाइसोसोम्स, एण्डोप्लाज्मिक रेटिकुलम, आदि होते हैं, जो विभिन्न विशिष्ट कार्य करते हैं। ये रचनाएं कोशिकांग कहलाती हैं तथा प्लाज्मा मैम्ब्रेन से सीमित रहते हैं। सभी कोशिकांग एक साथ समन्वित रूप में कार्य करते हैं। इसी को कोशिका का कोष्ठीकरण कहते हैं, क्योंकि प्रत्येक कोशिका कोशिका कला द्वारा सीमित होता है।
तारक काय तथा राइबोसोम्स को अंतर कोशिका कोष्ठ नहीं माना जाता क्योंकि यह कला से घिरे नहीं होते हैं।
केवल यूकैरियोटिक कोशिका में ही कोष्ठीकरण पाया जाता है। प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं में कोष्ठीकरण नहीं होता।