कोशिका विभाजन व क्रोमोसोम (Cell Division and Chromosome) -
केंद्रक में क्रोमैटिन नामक पदार्थ होता है जोकि उलझे हुए सूत्र की तरह केंद्रक में बिखरा रहता है। इन्हीं धागों पर जीन स्थित होते हैं जिनमें की जीवधारी के लक्षणों की सूचना निहित होती है। जिस कोशिका में विभाजन होता है उसे मातृ कोशा या जनक कोशा कहते है। जनक कोसा में विभाजन से जो कोशिकाएं बनती हैं उन्हें संतति कोशिकाएं कहते हैं।
जब जनक कोशिका में विभाजन होता है तो यह आवश्यक है कि सभी जरूरी चीजों का, जहां तक हो सके, बराबर-बराबर हिस्सा संतति कोशिकाओं को मिले। चूंकि गुणसूत्रों में कोशिका के संचालन के लिए सारी सूचनाएं होती है, यह आवश्यक है कि प्रत्येक गुणसूत्र की एक-एक नकल दोनों संतति कोशिकाओं को मिले। इसलिए कोशिका में विभाजन से पहले ही प्रत्येक क्रोमोसोम के दो क्रोमोसोम बन जाते हैं। इसके लिए क्रोमैटिन इतनी मात्रा में संश्लेषण होता है कि एक क्रोमोसोम के दो हूबहू क्रोमोसोम बन सके। केवल क्रोमोसोम ही नहीं बल्कि कोशिका के सभी आवश्यक अवयव जैसे प्रोटीन, विकर, कोशिकांगओ आदि का काफी तेजी से निर्माण कोशिका विभाजन से पूर्व होता है। कोशिका विभाजन के समय तक प्रत्येक क्रोमोसोम की दो - दो कापियाँ कोशिका में मौजूद होती है। जब कोशिका विभाजित होती है तो एक गुणसूत्र एक संतति कोशा में व बिल्कुल उसके जैसा (हुबहू) दूसरा गुणसूत्र दूसरी कोशिका में चला जाता है। इस प्रकार दोनों संतत कोशिकाओं में क्रोमोसोम की संख्या भी बराबर रहती है व उनके गुण भी समान रहते हैं। इसलिए इस प्रकार के विभाजन को समसूत्री विभाजन कहते हैं। अनेक जीव में प्रजनन तथा सभी जीवों की काया में वृद्धि का कारण समसूत्री विभाजन ही है।
लैंगिक रूप से प्रजनन करने वाले प्राणियों में एक और किस्म का कोशिका विभाजन होता है। इसे अर्धसूत्री विभाजन (मियोसिस) कहते हैं। हम जानते हैं कि प्रत्येक जाति की कोशिका में गुणसूत्रों की संख्या निश्चित होती है। या भी जानते हैं कि लैंगिक जनन में मादा की जनन कोशिका व नर की जनन कोशिका दोनों संयुक्त होकर युग्मनज़ बनाती है जिसमें कोशिका विभाजन के फलस्वरूप वृद्धि हो कर नया जीवधारी बनता है। उदाहरण के लिए, मानव की कोशिका में 46 गुणसूत्र होते हैं। यदि मनुष्य के शुक्राणु में 46 गुणसूत्र हों व स्त्री के अण्डज में भी 46 गुणसूत्र हो तो उनके संयुक्त होने पर युग्मनज़ में 46 + 46 = 92 गुणसूत्र हो जाएंगे। इनमें विभाजन से बनी प्रत्येक कोशिका में 92 में गुणसूत्र हो जाएंगे अगली पीढ़ी में 92 + 92 = 184 गुणसूत्र हो जाएंगे। लेकिन प्रकृति में ऐसी गड़बड़ होती नहीं है। वास्तव में, शुक्राणु या अंड बनने के समय विभाजन इस प्रकार होता है कि संतति कोशिकाओं में जनक कोशिका की तुलना में केवल आधे गुणसूत्र रह जाते हैं - 46 के 23 (शुक्राणु में, 23 अण्डज)। शुक्राणु और अण्डज के संयुक्त होने पर 23 + 23 = 46 गुणसूत्र (जनक के समान संख्या) युग्मनज़ में हो जाएंगे। इसप्रकार पीढ़ी-दर-पीढ़ी गुणसूत्रों की संख्या निश्चित रह जाती है। क्योंकि इस प्रकार के विभाजन में गुणसूत्रों की संख्या आधी (उक्त उदाहरण में 46 से 23 ) रह जाती है, उसे इसे अर्धसूत्री विभाजन कहते हैं।