भारतीय संस्कृति या कहे कि हिंदू संस्कृति में महिलाओं को प्राचीन काल से सम्मान सशक्त और सम्माननीय माना जाता था। हमारे प्राचीन वैदिक साहित्य में महिलाओं के सम्मान व सामान्य स्तर से संबंधित अनेक श्लोक हैं ।इनमें से एक मुझे अत्यंत प्रिय है।
अहिल्या द्रौपदी कुंती तारा मंदोदरी तथा
पंचकन्या स्मरेन्नित्यं महा पातक नासका ।
अर्थात इन पांच कन्याओं को नित्य स्मरण करने से महा पापों का नाश होता है। कितना आदरणीय स्थान प्राप्त था हमारे यहां महिलाओं को ।महिला शक्ति सृष्टि शिक्षा तथा वैभव की प्रतीक मानी गई हैं ।लक्ष्मी सरस्वती व काली तीन देवियों को धर्म शास्त्रों में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान प्राप्त है ।मेरा मानना है कि देवताओं ने लक्ष्मी को वित्त मंत्री सरस्वती को मानस शिक्षा मंत्री व काली को रक्षा मंत्री का स्थाई दर्जा दिया हुआ है ।आप लोग सोचेंगे कि यह क्या बात है धन के लिए हम मा लक्ष्मी को आराधना करते हैं और शिक्षा के लिए सरस्वती की तथा काली की पूजा स्वयं व समाज की बुराइयों को संहार व नवसृस्टि के लिए करते हैं। भारत के अलावा विश्व में शायद ही कोई ऐसा देश है जहां नवरात्र पर्व मनाया जाता है।
प्रायर कहा जाता है महिला बचपन में पिता के अधीन जवानी में भाई के अधीन विवाह उपरांत पति के और वृद्धावस्था में पुत्र के अधीन आश्रित होती हैं। मतलब महिलाएं अपने जीवन की चार अवस्था में किसी न किसी रूप में किसी पुरुष पर आश्रित रहेंगी ।क्या विडंबना है पुरुष को जन्म देने वाली महिला को कन्या ,बहन, भार्य और मां के रूप में पुरुषों ने अपने समकक्ष रहने का अवसर ही नहीं दिया। लेकिन जीवन के सभी क्षेत्रों में कुछ महिलाओं ने के आने के कारण अन्य महिलाओं ने अपने अधिकारों के प्रति जागरूकता आई है। प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं ।आज मार्केटिंग बैंकिंग विज्ञान एवं शानदार जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं ने अपनी विशेष पहचान बना ली है। इंदिरा नोई, रत्ना शाहनाज हुसैन ,सुनीता विलियम्स ,कल्पना चावला, अरुंधति भट्टाचार्य ,श्रीमती जे मंजुला ,ना जाने ऐसी ही कई हस्तियां है जो अपने अपने कार्य क्षेत्र में शिखर पदों पर आसीन हैं।