1. सविनय अवज्ञा आंदोलन स्थगित होने के बाद महात्मा गांधी ने देश में रचनात्मक कार्यों को प्रोत्साहित करते रहे इसी बीच 1939 में द्वितीय विश्व युद्ध शुरू हुआ।
2. 15 जनवरी 1942 को जवाहरलाल नेहरू को अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किया इस निर्णय के लिए महात्मा गांधी की कई लोगों ने आलोचना भी की क्योंकि उनका मानना था कि सरदार वल्लभभाई पटेल तुलनात्मक रूप से ज्यादा योग्य थे।
3. अंग्रेजों द्वारा भारत की आजादी के संबंध में उचित निर्णय न लेने पर 8 अगस्त 1942 को मुंबई के ग्वालिया टैंक में महात्मा गांधी द्वारा भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की गई इसी मैदान पर कांग्रेस कार्यकर्त्ता को संबोधित करते हुई 'करो या मरो' का नारा दिया था। 9 अगस्त 1942 की सुबह से भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत हुई।
4. 22 फरवरी 1944 को उनकी पत्नी कस्तूरबा गांधी की मृत्यु हो गई।
5. 15 अगस्त 1947 को कोलकाता में देश के विभाजन के खिलाफ अनशन पर बैठे क्योंकि महात्मा गांधी देश के विभाजन के खिलाफ थे। अपने अथक प्रयासों के बावजूद महात्मा गांधी देश के विभाजन को रोक सकने में असमर्थ हो गए फिर भी उनके योगदान को आज भी उतनी ही शिद्दत से याद किया जाता है।
6. देश के विभाजन से उत्पन्न सांप्रदायिक दंगों को रोकने के लिए 13 जनवरी 1948 को अनशन पर बैठे। जब देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ था उस समय महात्मा गांधी पश्चिम बंगाल के संप्रदायिक हिंसा से ग्रस्त नोआखली क्षेत्र में हिंसा को शांत करने के लिए उस क्षेत्र में भ्रमण कर रहे थे।
7. 30 जनवरी 1948 को नाथूराम गोडसे ने दिल्ली में महात्मा गांधी को गोली मार दी और इस महापुरुष ने अपने प्राण त्याग दिए।