गाँधी के सिद्धान्त

1. सभी परिस्थितियों में अहिंसा और सत्य का पालन किया और सभी से पालन करने के लिए वकालत भी की । साबरमती आश्रम में परंपरागत भारतीय पोशाक धोती व सूत से बनी साल पहनकर जीवन गुजारा , जिसे वे स्वयं चरखे पर सूत कात कर हाथ से बनाते थे । सादा शाकाहारी भोजन खाया करते थे और आत्म शुद्धि के लिए लंबे लंबे उपवास रखते थे।

2. असहयोग ,अहिंसा और शांतिपूर्ण प्रतिकार का प्रयोग गांधीजी ने अंग्रेजो के खिलाफ किया साथ ही साथ अन्य बुराइयों को दूर करने के लिए भी इन्हीं सिद्धान्तों का प्रयोग किया।

3. गांधी जी ने अपने जीवन में हमेशा सत्य ,अहिंसा ,शाकाहारी रवैया, ब्रह्मचर्य, सादगी और विश्वास को धारण किया।

4. गांधी जी के अहिंसा वादी विचारों का प्रसार करने के लिए 2 अक्टूबर को भारत में गांधी जयंती और पूरे विश्व में अंतरराष्ट्रीय दिवस के रूप में मनाया जाता है इसी दिन महात्मा गांधी का जन्म हुआ था।

5. गांधी जी ने अपने दृष्टिकोण को हिंद स्वराज, दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह का इतिहास ,सत्य के प्रयोग (आत्मकथा) तथा गीता पर लिखी अपनी टीका, में उल्लेखित किया है।

6. इस प्रकार यह कहा जा सकता है के गांधी दर्शन में हिंसा को कोई स्थान नहीं है जिसमें अन्याय और अत्याचार को दूर करने के लिए अभिनव प्रयोग किए गए हैं इसी कारण महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने सही ही कहा था कि आने वाली पीढ़ी शायद ही विश्वास करेगी कि इस धरती पर कोई हांड मांस का कोई ऐसा व्यक्ति भी धरती पर था।

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