संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम UNDP और ऑक्सफोर्ड गरीबी एवं मानव विकास पहल OPHI द्वारा जारी 2018 विश्वव्यापी बहुआयामी गरीबी सूचकांक MPI के अनुसार पिछले 10 वर्षों में भारत में बहुआयामी गरीबों की संख्या घटकर लगभग आधी हो गई है। यह 54.7 प्रतिशत से गिरकर 27.5 प्रतिशत हो गई है।
गरीबी में रहने वाले सभी लोगों में से आधे 18 साल से कम उम्र के हैं।
2018 की रिपोर्ट ने 105 देशों के लिए डेटा प्रदान किया, जो दुनिया की लगभग 75 प्रतिशत आबादी को कवर करती है।
बहुआयामी गरीबी के लिहाज से देखा जाए तो दक्षिण एशियाई देशों में सिर्फ मालदीव की स्थिति भारत से अच्छी है।
MPI सिर्फ आय के आधार पर गरीबी की गणना नहीं करताहै यह सूचकांक इसे इस प्रकार समझने की कोशिश करता है कि लोग अनेक कारणों से और कई बार उन सभी कारणों से गरीबी का शिकार होते हैं।
सूचकांक बताता है कि लोग तीन मुख्य पहलुओं के कारण पिछड़ जाते हैं। ये पहलु हैं स्वास्थ्य, शिक्षा और जीवन स्तर।
जो लोग न्यूनतम तीन सूचकांकों से वंचित होते हैं, उन्हें बहुआयामी गरीब माना जाता है।