सैय्यद वंश (1414-1451)

सैय्यद वंश (1414-1451)

चार शासक-

(1)   खिज्र खाँ (1414-1421 ई0)  - अपने रैय्यत-ए-आला कहा।

(2)   मुबारक शाह (1421-1433 ई0)     - इसने अपने को सर्वप्रथम सुल्तान घोषित किया। इसने तारीखे मुबाकर शाही के लेखक सर हिन्दी को संरक्षण दिया।

(3)   मुहम्मद शाह (1433-1443 ई0)    -

(4)   अलाउद्दीन आलम शाह (1443-1451 ई0)- इस वंश का अंतिम शासक था।

      सैय्यद वंश का संस्थापक खिज्र खाँ था।

      उसने मंगोल आक्रमणकारी तैमूर लंग को सहयोग प्रदान किया था। और उसकी सेवाओं के बदले तैमूर ने उसे लाहौर मुल्तान एवं दिपालपुर की सूबेदारी सौपी।

      खिज्र खाँ सुल्तान की उपाधि धारण नही की वह रैयत-ए-आला की उपाधि से ही संतुष्ट था।

      खिज खाँ की मृत्यु 20 मई 1421 को हो गयी। खिज्रखाँ के पुत्र मुबारक खाँ ने शाह की उपाधि धारण की थी।

      खिज्र खाँ ने तारीख-ए-मुबारक शाही के लेखक याहिया बिन सरहिन्दी को संरक्षण प्रदान किया।

      मुबारकशाह ने मुबारकाबाद नगर की स्थापना की थी।

      अलाउद्दीन आलमशाह इस वंश का अन्तिम शासक था।

      बहलोल लोदी ने इसे गद्दी से उतार दिया तथा लोदी वंश की नीव रखी।

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