2.उष्णकटिबंधीय पतझड़ वाले (मानसूनी) वन:-
वे वन भारत के उन भागों में पाए जाते हैं, जहां वर्षा 100 से 200 सेंटीमीटर तक होती है। ये वन गर्मी के प्रारंभ में ही अपनी पत्तियां गिरा देते हैं, इसलिए इन्हें पतझड़ वाले या मानसूनी वन भी कहते हैं। ये वृक्ष अधिक लंबे एवं सघन नहीं होते। इन वनों में साल, सागौन, शीशम, चंदन, आम, साखू, हरड़-बहेड़ा, आंवला, महुआ, एवं हल्दू के वृक्ष पाए जाते हैं। इस प्रकार के वनों का विस्तार मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, झारखंड, उत्तर प्रदेश तथा उत्तरांचल राज्यों में है। इन वनों की लकड़ी मुलायम, मजबूत और टिकाऊ होती है। भारत में लगभग 220 लाख हेक्टेयर क्षेत्र पर इस प्रकार के वन फैले हैं।
पतझड़ वाले वनों की विशेषताएं:-
वृक्ष कम लंबे व खुले वन
सामान प्रकार के क्षेत्रीय वृक्ष
अधिक व्यवसायिक लकड़ियां
देश के सर्वाधिक आर्थिक महत्व वाले वन
चारागाह व कच्चा माल मिलना
उनको बराबर पुनः स्थापित करना
देश के सर्वाधिक क्षेत्र विस्तार वाला वन
3. उष्णकटिबंधीय घास के मैदान:-
शुष्क मैदानी भागों में घास के मैदान पाए जाते हैं। इन भागों में वर्षा 50 से 100 सेंटीमीटर तक होती है। यहां वर्षा ऋतु में लंबी-लंबी घास उग आती है। नदी, झील एवं आर्द्र भागों के निकट पतझड़ वृक्षों के कुंज या कतारें भी पाए जाती हैं। मैदानी भागों में अब घास के मैदान समाप्त हो चुके हैं। यहां सभी ओर सिंचाई की सहायता से कृषि का विस्तार किया गया है। परंतु पठारी भागों में कहीं-कहीं घास के क्षेत्र पाए जाते हैं। इस प्रकार के वनस्पति कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के पठारी भागों में पाई जाती है।
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