'मधुमेह' एंटीबायोटिक्स से खतरा

बार-बार एंटीबायोटिक्स खाने से व्यक्ति को मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बुखार, खांसी ,जुखाम में बार-बार एंटीबायोटिक दवाएं खाने से बचना चाहिए। हाल ही में अमेरिका में हुए अध्ययन से पता चला है कि एंटीबायोटिक से टाइप 2 मधुमेह का खतरा 53% बढ़ जाता है। यह अध्ययन कोपेनहेगन विश्वविद्यालय के मधुमेंह शोध केंद्र ने किया है।

पूरी दुनिया में सिर्फ भारत में ही सबसे ज्यादा मधुमेह के मरीज हैं और यही एंटीबायोटिक्स का सबसे अधिक दुरुपयोग होता है। यही कारण है कि अमेरिका में हुए इस अध्ययन का भारत के लिए विशेष महत्व है डॉक्टरों का कहना है कि भारत के परिपेक्ष में इस बारे में और अध्ययन की आवश्यकता है। फिर भी वे एंटीबायोटिक से मधुमेह के खतरे को नकार नहीं रहे। असल में एंटीबायोटिक्स के कारण पेट के अंदर बैक्टीरिया की संख्या और उनका स्वरूप बदल जाता है। पेट में कुछ अच्छे और कुछ बुरे बैक्टीरिया होते हैं लगातार एंटीबायोटिक से खाने से मेटाबॉलिज्म असंतुलित हो जाता है अच्छे बैक्टीरिया की संख्या घट जाती है और बुरे बैक्टीरिया की संख्या बढ़ जाती है। इससे पेनक्रियाज का संतुलन बिगड़ जाता है और मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टरों का कहना है कि आज के अंदर मौजूद जीवाणु इसके काम करने की क्षमता को संतुलित रखते हैं। लेकिन जब इन जीवाणु की गतिविधि गतिविधि होती है तो आपका मेटाबॉलिज्म असंतुलित हो जाता है। पेट में एंटीबायोटिक से रहने के समय कुछ लोगों को दस्त अपच की परेशानी हो जाती है इससे आंत के अंदर जीवाणुओं का बुरा असर पड़ता है ।इसी वजह से जब मेटाबॉलिज्म पर असर पड़ता है तो मधुमेह का खतरा बढ़ जाता है ।भारत में हर छोटी बड़ी बीमारी में एंटीबायोटिक्स खाने का चलन है। कुछ डॉक्टर भी मामूली बीमारी पर दो-तीन एंटीबायोटिक्स की खुराक लिख देते हैं ।महीने ,2 महीने, ऐसे ही एंटीबायोटिक लेने से ऐसे मरीजों में मधुमेह का खतरा बढ़ता जाता है।

Posted on by