चिकित्सा के अनुसार गर्भावस्था का कारण पुरुष गैमीट एवं स्त्री गैमीट के मिलन की प्रक्रिया यानी फर्टिलाइजेशन यह सामान्य रूप से कांसेप्शन होता है। फर्टिलाइजेशन के बाद यह भ्रूण की आकृति धारण कर लेती है ।स्त्री और पुरुष के गैमीट का मिलन संभोग के समय होता है। किन्ही कारणों से गर्भ नहीं ठहर रहा हो तो आज यह आसानी से और कम कीमत पर चिकित्सीय सुविधाएं उपलब्ध है। जिसके कारण मातृत्व सुख मिलना कोई बड़ी बात नहीं है।
अगर नारी के ओवरी में कोई खराबी है या फेलोपियन ट्यूब में रुकावट है तो वह प्राकृतिक रूप से मां बनने से वंचित हो जाती है। लेकिन आज चिकित्सा विज्ञान में अब यह कोई चुनौती नहीं रह गई है ।टेस्ट ट्यूब बेबी तकनीक जिसमें मां के डिंब पुरुष के सीमन से प्रयोगशाला में निषेचन कराकर नारी के गर्भ में स्थापित किया जाता है ।और वह मां बनने की प्रक्रिया में आ जाती है।
कांसेप्शन के बाद गर्भावस्था की युवा वास्तविक अवधि 38 सप्ताह की होती है वैसे तो गर्भावस्था की शुरुआत कांसेप्शन से ही होती है ।परंतु इसकी अवधि कोई स्त्री के पहले मासिक धर्म से नापा जाता है। इन में से किसी एक तिथि के प्रशव तिथि ज्ञात हो सकती है ।नेगिल्स नियम के आधार के अनुसार गर्भावस्था की अवधि 40 सप्ताह यानी 9 महीने और 6 दिन आए मानो गर्भावस्था को तीन तिमाही अवधि में बांटा गया जिसमें जन्म पूर्व विकास को समझना आसान हो जाता है।
अधिकतर महिलाएं गर्भावस्था की ओर इशारा करने वाले अनेक लक्षणों का अनुभव करती हैं जी मचलाना, एवं उल्टी करना ,अधिक थकान आमतौर पर ज्यादा पसंद ना आने वाले खाद्य पदार्थ की ओर लालायित होना। विशेष रूप से रात में लगातार पेशाब आना इसके कुछ संकेत हैं।