अनुच्छेद 370 से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण तथ्य।

  1.  भारतीय संविधान के अलावा जम्मू कश्मीर राज्य का अपना संविधान है।
  2. यह राज्य 'दोहरी नागरिकता' का अनुसरण करता है- भारत की नागरिकता और जम्मू कश्मीर राज्य की नागरिकता।
  3. राज्य की अवशिष्ट शक्ति जम्मू कश्मीर विधानसभा के पास है, ना कि भारत की संसद के पास।
  4. रक्षा, विदेशी मामलों, वित्त और संचार के अलावा संसद को अन्य सभी कानूनों को लागू करने के लिए राज्य सरकार की सहमति की जरूरत है।
  5. युद्ध या बाहरी आक्रमण के आधार पर घोषित राष्ट्रीय आपातकाल राज्य पर स्वत: विस्तारित होता है जबकि सशस्त्र विद्रोह के आधार पर घोषित राष्ट्रीय आपातकाल जम्मू कश्मीर पर स्वत: विस्तारित नहीं होता।
  6. राज्य आपातकाल (राष्ट्रपति शासन )राज्य पर लागू है। फिर भी यह आपातकाल राज्य पर संवैधानिक तंत्र के (राज्य संविधान के ना कि भारतीय संविधान के) विफल होने पर लागू हो सकता है ।
  7. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 360 के तहत वित्तीय आपातकाल इस राज्य पर नहीं लगाया जा सकता।
  8. राज्य के राज्यपाल को उस राज्य में मुख्यमंत्री के साथ परामर्श के बाद ही नियुक्त किया जाता है।
  9. भारतीय संविधान में निहित नीति निदेशक सिद्धांत और मूल कर्तव्य जम्मू कश्मीर राज्य पर लागू नहीं हैं।
  10. भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22 में वर्णित निवारक निरोधक कानूनों का राज्य के लिए स्वत: विस्तार नहीं है ।इसका अधिकार राज्य विधानमंडल के पास है, अर्थात संसद द्वारा बनाई गई निवारक निरोध संबंधी विधियां राज्य पर लागू नहीं होगी।
  11. राज्य विधान मंडल की सहमति के बिना जम्मू और कश्मीर राज्य का नाम, सीमा, क्षेत्र, संसद द्वारा परिवर्तित नहीं किया जा सकता।
  12. भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1) (च) और 31(2) को इस राज्य के लिए समाप्त नहीं किया गया है और इस तरह संपत्ति के अधिकार की गारंटी अभी भी जम्मू और कश्मीर के लोगों को प्राप्त है।
  13. भारत के संविधान में कोई भी संशोधन राज्य पर लागू नहीं होता ,जब तक कि यह राष्ट्रपति के आदेश द्वारा विस्तारित ना हो जाए।
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