प्रत्येक वर्ष 8 मार्च को पूरे विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है।
इस दिन सम्पूर्ण विश्व की महिलाएँ देश, जात-पात, राजनीतिक, सांस्कृतिक भेदभाव से हटकर एकजुट होकर इस दिन को मनाती हैं। महिला दिवस पर स्त्री की प्रेम, स्नेह व मातृत्व के साथ ही शक्तिसंपन्न स्त्री की मूर्ति सामने आती है। 21वी सदी की स्त्री ने स्वयं की शक्ति को पहचान लिया है और काफी हद तक अपने अधिकारों के लिए लड़ना सीख लिया है। आज के समय में स्त्रियों ने सिद्ध किया है कि वे एक-दूसरे की दुश्मन नहीं, सहयोगी हैं।
“नारी तुम केवल श्रद्धा हो, विश्वास रजत नग पग तल में।
पीयूष स्रोत सी बहा करो, जीवन के सुंदर समतल में।।“
इतिहास के अनुसार आम महिलाओं द्वारा समानाधिकार की यह लड़ाई शुरू की गई थी। लीसिसट्राटा नामक महिला ने प्राचीन ग्रीस में फ्रेंच क्रांति के दौरान युद्ध समाप्ति की मांग रखते हुए आंदोलन की शुरुआत की,इसका उद्देश्य युद्ध के कारण महिलाओं पर बढ़ते अत्याचार को रोकना था। पहली बार सन् 1909 में सोशलिस्ट पार्टी ऑफ़ अमेरिका द्वारा पूरे अमेरिका में 28 फरवरी को महिला दिवस मनाया गया था। 1911 में ऑस्ट्रिया, डेनमार्क, जर्मनी और स्विट्जरलैंड में लाखों महिलाओं ने रैली निकाली। इस रैली में मताधिकार, सरकारी नौकरी में भेदभाव खत्म करने जैसे मुद्दों की मांग उठी। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान, रूसी महिलाओं द्वारा पहली बार शांति की स्थापना के लिए फरवरी के अंतिम रविवार को महिला दिवस मनाया गया।यूूरोप भर में भी युद्ध विरोधी प्रदर्शन हुए।रूसी महिलाओं ने फिर रोटी और शांति के लिए इस दिन हड़ताल की हालांकि राजनेता इसके खिलाफ थे, फिर भी महिलाओं ने आंदोलन जारी रखा और तब रूस के जार को अपनी गद्दी छोड़नी पड़ी और सरकार को महिलाओं को वोट के अधिकार की घोषणा करनी पड़ी।महिला दिवस' अब लगभग सभी विकसित, विकासशील देशों में मनाया जाता है। 'संयुक्त राष्ट्र संघ' ने भी महिलाओं के समानाधिकार को बढ़ावा और सुरक्षा देने के लिए विश्वभर में कुछ नीतियाँ, कार्यक्रम और मापदंड निर्धारित किए हैं। भारत में भी 'महिला दिवस' व्यापक रूप से मनाया जाने लगा है।
अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को ही मनाया जाने का कारण, क्लारा जेटकिन ने महिला दिवस मनाने के लिए कोई तारीख़ पक्की नहीं की थी। सन 1917 में युद्ध के दौरान रूस की महिलाओं ने 'BREAD &PEACE ' (यानी खाना और शांति) की मांग की। महिलाओं की हड़ताल ने वहां के सम्राट निकोलस को पद छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया और अंतरिम सरकार ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया। उस समय रूस में जूलियन कैलेंडर का प्रयोग होता था। जिस दिन महिलाओं ने यह हड़ताल शुरू की थी, वह तारीख़ 23 FEBRUARY थी। ग्रेगेरियन कैलेंडर में यह दिन 8 मार्च था और उसी के बाद से अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस 8 मार्च को मनाया जाने लगा।
कई देशों में इस दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय अवकाश की घोषणा की जाती है। रूस और दूसरे कई देशों में इस दिन के आस-पास फूलों की कीमत काफी बढ़ जाती है। इस दौरान महिला और पुरुष एक-दूसरे को फूल देते हैं।चीन में ज्यादातर दफ्तरों में महिलाओं को आधे दिन की छुट्टी दी जाती है। वहीं america में march का महीना 'Womens History months ' के तौर पर मनाया जाता है।