अरविडु वंश का अन्तिम महान शासक वेंकट द्वितीय (1586-1614) था। इसने 1610 में डचो को पुलीकट में अपना कारखाना खोलने की अनुमति दिया।
वेंकट द्वितीय का सीधा पत्र व्यवहार स्पेन के शासक फिलिप तृतीय से था।
वेंकट द्वितीय को चित्रकला में बड़ी रूचि थी। इसने दो जेसुइट चित्रकार अपनी सेवा में रखा था।
रंग तृतीय विजय नगर का अन्तिम शासक था।
विजयनगर काल में पुलिस का वेतन वेश्याओ से होने वाली आय से दिया जाता था। इसका उल्लेख अब्दुर्रज्जाक के विवरण से मिलता है।
विजय नगर साम्राज्य तंुग भद्रा नदी के किनारे स्थित है।
बुक्का प्रथम ने वेद मार्ग प्रतिष्ठापक की उपाधि धारण की। इसने वेदों के प्रसिद्ध भाष्यकार सायणाचार्य के प्रश्रय दिया। इसने चीन में अपना एकदूत मण्डल भेजा था।
हरिहर द्वितीय ने सबसे पहले महाराजधिराज की उपाधि धारण की। इसने लंका पर विजय प्राप्त किया और वही के राजा से राजस्व वसूल किया।
फारसी राजदूत अब्दुल रज्जाक देवराय द्वितीय के शासन काले में आया था।
सालुव नर सिंह ने विजय नगर में दूसरे राजवंश सालुव वंश की स्थापना की।
विजय नगर आने वाले प्रमुख विदेशी यात्री
विजयनगर आने वाले प्रमुख विदेशी यात्री
1. देवराज प्रथम ः निकोलो कोंटी (इटली)-दासप्रथा का विस्तृत वर्णन किया।
2. देवराज द्वितीय ः अब्दुर्रज्जाक-ईरान के शासक शाहरूक का राजदूत
3. कृष्ण देवराय ः बारबोसा (पुर्तगाली)-सतीप्रथा का विस्तृत वर्णन किया।
4. कृष्ण देवराय ः पायस (पुर्तगाली) नवरात्र व्यवहार का वर्णन किया।
5. अच्युत देवराय ः नूनिज (पुर्तगाली)-सतीप्रथा का वर्णन
6. मल्लिकार्जुन ः माहुयान (चीनी)-समुदी यात्रा से विजय नगर आयौ
7. सीजर फ्रेडरिक ः तालीकोटा युद्ध के बाद विजयनगर आया।
8. निकितिन ः एसी अश्व व्यापारी वीदर आया था।