एल नीनो के दौरान व्यापारिक पवनें मध्य एवं पश्चिमी प्रशांत महासागर में शांत होती हैं । इससे गर्म जल को सतह पर जमा होने में मदद मिलती है जिसके कारण ठंडे जल के जमाव से पैदा हुए पोषक तत्वों को नीचे खिसकना पड़ता है और तैरने वाले जीवो और अन्य जलीय जीवो जैसे मछलियों का नाश होता है तथा अनेक समुद्री पक्षियों को भोजन की कमी होती है । इसे एल नीनो प्रभाव कहा जाता है । एल नीनो का एक प्रभाव यह होता है कि वर्षा के प्रमुख क्षेत्र बदल जाते हैं। परिणाम स्वरूप विश्व के ज्यादा वर्षा वाले क्षेत्रों में कम वर्षा और कम वर्षा वाले क्षेत्रों में ज्यादा वर्षा होने लगती है । कभी कभी इसके विपरीत भी होता है उदाहरण के लिए इंडोनेशिया में 1983 में पड़ा अकाल, सूखे के कारण ऑस्ट्रेलिया के जंगलों में लगी आग , कैलिफोर्निया में भारी बारिश एवं पेरु के तट पर मत्स्य क्षेत्र का विनाश । हिंद महासागर में मानसूनी पवनों का चक्र भी कई बार इससे प्रभावित हुआ। भारतीय मानसूनी वर्षा भी एल नीनो प्रभाव से प्रभावित हो जाया करती है जिसका भारतीय कृषि पर विपरीत असर होता है।