अमेरिकी वैज्ञानिकों फ्रांसेस 'अर्नोल्ड' और 'जार्ज स्मिथ' तथा ब्रिटिश अनुसंधानकर्ता 'ग्रेगरी विंटर' ने 3 अक्टूबर को रसायन विज्ञान का नोबेल पुरस्कार जीता।
इन्होंने क्रमविकास के सिद्धांतों का उपयोग कर जैव ईंधन से लेकर औषधि तक, हर चीज बनाने में इस्तेमाल होने वाले एंजाइम का विकास करने के सिलसिले में तीनों वैज्ञानिकों को रसायन विज्ञान के क्षेत्र में प्रतिष्ठित नोबेल पुरस्कार के लिए चुना गया है ।
अर्नोल्ड रसायन विज्ञान के क्षेत्र में नोबेल जीतने वाली पांचवीं महिला हैं। उन्होंने पुरस्कार राशि 90 लाख स्वीडिश क्रोनोर (करीब 10.1 लाख डॉलर या 870,000 यूरो) की आधी रकम जीत ली। शेष आधी रकम स्मिथ और विंटर के बीच विभाजित की जाएगी।तीनों वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में प्रोटीन के इस्तेमाल के लिए क्रम विकास के उसी सिद्धांत का इस्तेमाल किया जिसके जरिए आनुवंशिक बदलाव और चयन किया जाता है।
चिकित्सा के क्षेत्र में साल 2018 के नोबेल पुरस्कार की घोषणा कर दी गई है। इस बार दुनिया का ये सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार संयुक्त रूप से अमेरिका के जेम्स पी. एलिसन और जापान के तासुकू होंजो को दिया गया है।
इन्हें ये पुरस्कार कैंसर थेरपी की खोज के लिए मिला है। दोनों वैज्ञानिकों ने कैंसर के इलाज के लिए ऐसी थेरपी की खोज की है जिसके द्वारा शरीर की कोशिकाओं में इम्यून सिस्टम को कैंसर ट्यूमर से लड़ने के लिए मजबूत बनाया जा सकेगा।
एलिसन, टेक्सास विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं और होन्जो, क्योतो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं।इन दोनों को नोबेल पुरस्कार के तहत लगभग 10.1 लाख अमेरिकी डॉलर मिलेंगे।
एलीसन और होन्जो को 10 दिसम्बर को स्टॉकहोम में एक औपचारिक समारोह में ये पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
इस बार साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिए जाने का फैसला किया गया है। पिछले 70 साल में पहली बार ऐसा है कि साहित्य का नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाएगा।