भारत की मिट्टीओं को 8 वर्गों में विभाजित किया गया है ।
१- जलोढ़ मिट्टी
२- लाल मिट्टी
३- काली मिट्टी
४- लैटेराइट मिट्टी
५- पर्वतीय मिट्टी
६- मरुस्थलीय मिट्टी
७- लवणीय मिट्टी
८- दलदली मिट्टी
१- जलोढ़ मिट्टी -
इस मिट्टी का निर्माण नदियों द्वारा लाया जाए अवसाद के जमाव से होता है यह मिट्टी एक उपजाऊ मिट्टी है इस मिट्टी का विस्तार उत्तर के विशाल मैदान नदियों के डेल्टाई प्रदेश तथा पूर्व एवं पश्चिम तटीय मैदानों में पाया जाता है या मिट्टी भारत में सबसे अधिक क्षेत्रफल पर पाई जाती है ।
२- लाल मिट्टी-
क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में इसका स्थान दूसरा है इसका निर्माण प्राचीन चट्टानों के टूटने फूटने से हुआ है क्या कम उपजाऊ मिट्टी है लोहा और आकसाइड मिले हुए होने के कारण उसका रंग लाल दिखाई देता है
इसका सर्वाधिक विस्तार तमिलनाडु में हैं इसके अलावा कर्नाटक , महाराष्ट्र , आंध्रप्रदेश , उड़ीसा , छत्तीसगढ़ आदि राज्य में पाई जाती है ।
३- काली मिट्टी -
इसे रेगुण या काली कपासी मिट्टी भी कहा जाता है क्षेत्रफल की दृष्टि से भारत में स्थान तीसरा है इसका निर्माण ज्वालामुखी चट्टानों के अपक्षय तथा अपरदन से हुआ है इस मिट्टी का विस्तार महाराष्ट्र गुजरात मध्य प्रदेश आंध्र प्रदेश कर्नाटक आदि राज्यों में पाया जाता है ।
४- लैटेराइट मिट्टी -
इस मिट्टी का विस्तार उन प्रदेशों में पाया जाता है जहां वर्षा अधिक होती है यह मिट्टी भी चट्टानों के टूटने फूटने से बनी है अधिक वर्षा के कारण मिट्टी में अवस्थित घुलनशील पदार्थ जल के साथ खुलकर मिट्टी के नीचे चले जाते हैं या मिट्टी कम उपजाऊ वाली मिट्टी है इसका विस्तार केरल के मालाबार तट पर पाया जाता है ।