बालाजी विश्वनाथ (१७१३ - १७२०) भाग - २ संक्षिप्त अध्ययन

  • बालाजी विश्वनाथ १७१४ ई० मे औरंगज़ेब के मक़बरे तक पैदल चलकर ख़ुलदाबाद गया तथा उसके प्रति सम्मान व्यक्त किया ।
  •  बालाजी विश्वनाथ ने दक्कन की चौथ और सरदेशमुखी  देने के लिए जुल्फिकार ख़ान को राज़ी कर लिया एवं अंत में उसने सैय्यद बन्धुओं के साथ एक समझौते पर दस्तख़त किए तथा वे सारे इलाक़े जो पहले शिवाजी के राज्य के हिस्से थे , साहू को वापस कर दिए गए ।
  •  मराठों को दक्कन के छः सूबों की  चौथ व  सरदेशमुखी प्राप्त करने का अधिकार दे दिया गया । उसके प्रतिकार के रूप में शाहू ने बादशाह की सेवा में पन्द्रह हज़ार घुड़सवार सैनिकों को देने दककन में बग़ावत और लूट मार रोकने तथा 10 लाख रुपयों का सालाना नज़राना पेश करने पर राज़ी हो गया । नाम मात्र के लिए ही सही बालाजी विश्वनाथ पहले ही मुग़ल आधिपत्य स्वीकार कर चुका था ।
  •  दिल्ली में बालाजी विश्वनाथ और अन्य मराठा सरदारों ने मुग़ल साम्राज्य की कमज़ोरी को स्वयं देखा तथा उसमें अपना प्रभाव क्षेत्र उत्तर की ओर बढ़ाने की महत्वाकांक्षा ने उनको घेर कर लिया 
  •  चौथ और सरदेशमुखी  सौंपने की प्रथा ने भी पेशवा को संरक्षण के ज़रिये अपनी व्यक्तिगत शक्ति बढ़ाने में सहायता दी । बालाजी विश्वनाथ १७२० ईसा पूर्व में मारा गया । उसकी जगह पर उसका २० वर्ष का  बेटा बाजीराव प्रथम पेशवा बना ।
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