ब्रिटिश भारत के 51% भाग पर रैयतवाड़ी व्यवस्था लागू थी।इसलिए कंपनी यहाँ भू राजस्व में बिचौलियों को मिलने वाली कोई भी मात्रा अपने पास ही रखना चाहती थी।उसने यहाँ जमीदारों से अनुबंध न कर सीधा रैयत से अनुबंध किया।
1792 ई० से 1820 ई० के बीच इसे लागू किया गया।इस प्रेसिडेंसी कमी खेतों के बड़े पैमाने पर सर्वेक्षण किया गया। भूमि की माप और उसके मूल्यांकन के आधार पर प्रत्येक खेत के लिए लगान के रूप में एक रााशि निर्धारित कर दी जााती थी। सर्वप्रथम इस व्यवस्था को मद्रास के बारामहल जिले में 1792 में लागू किया गया था।कैप्टेन रीड एवं मुुनरो ने इस व्यवस्था को लागू किया । जिसमे लगान की दर 50% निर्धारित किया था।