सशक्तिकरण के लिए स्वच्छ पर्यावरण

संयुक्त राष्ट्र ने कल मुझे चैंपियंस ऑफ द अर्थ अवार्ड से सम्मानित किया। सम्मान प्राप्त करके मैं बहुत अभिभूत हूं। मैं महसूस करता हूं कि यह पुरस्कार किसी व्यक्ति के लिए नहीं है यह भारतीय संस्कृति और मूल्यों की स्वीकृति है। जिसने हमेशा प्राकृतिक के साथ सौहार्द बनाने पर बल दिया है जलवायु परिवर्तन में भारत की सक्रिय भूमिका को मान्यता मिलना और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस व संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के कार्यकारी निदेशक शोध द्वारा भारत की भूमिका की प्रशंसा प्रत्येक भारतीय के लिए कपड़े और पति के बीच संबंध रहे हैं प्रकृति और माता ने हमारा पालन-पोषण किया है बताएं नदियों के तट पर स्थापित हुई  प्रीति के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से रहने वाले समाज फलते फूलते और समृद्ध होते हैं मानव समाज आज एक महत्वपूर्ण चौराहे पर खड़ा है हमने जो रास्ता तय किया है वह ना केवल हमारा कल्याण निर्धारित करेगा बल्कि हमारे बाद इस ग्रह पर आने वाली पीढ़ियों को भी खुशहाल रखेगा लालच और आवश्यकताओं के बीच असंतुलन ने गंभीर पर्यावरण असंतुलन पैदा कर दिया है हम या तो इसे स्वीकार कर सकते हैं या पहले ही तेरा ही चल सकते हैं या सुधार के उपाय कर सकते हैं इन चीजों से तय होगा कि कैसे एक समाज सार्थक परिवर्तन ला सकता है पहली चीज आंतरिक चेतना है। इसके लिए अपने गौरव शील अतीत को देखने से बेहतर कुछ नहीं हो सकता।

प्रकृति का सम्मान भारत की परंपरा के मूल में है अथर्ववेद में पृथ्वी सूक्त शामिल है जिसमें प्रकृति और पर्यावरण के बारे में अच्छा ज्ञान है यानी माता पृथ्वी अभिनंदन उनमें निहित है महासागर और नदियों का जल में सन्निहित है भोजन जो भूमि की जुदाई द्वारा भी प्रकट करती है उनमें निश्चित रूप से सभी जीवन समाहित है वह हमें जीवन प्रदान करें महात्मा गांधी ने पर्यावरण के बारे में बहुत गहराई से लिखा है उन्होंने ऐसी जीवनशैली को व्यवहार में उतारा जिसमें पर्यावरण के प्रति भावना प्रमुख है उन्होंने आस्था का सिद्धांत दिया जिसमें हमें या दायित्व सौंपा गया है कि हम अगली पीढ़ी को स्वच्छ पर धारा प्रदान करें उन्होंने युक्ति संगत खपत का आवाहन किया ताकि विश को संसाधनों की कमी का सामना ना करना पड़े दूसरा पक्ष जन जागरण का है हमें पर्यावरण के प्रश्नों का यथासंभव बातचीत करने लिखने चर्चा करने की आवश्यकता है।

साथी अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहित देने में भी है इस तरह ज्यादा से ज्यादा लोगों को हमारे समय की गंभीर चुनौतियों को जानने और उन्हें दूर करने के प्रयासों पर सोचने का अवसर मिलेगा। जब हम पर्यावरण संरक्षण से अपने मजबूत रिश्तो के बारे में जागरूक होंगे उस पर चर्चा करेंगे तब सतत पर्यावरण की दिशा में हम स्वयं सकरी हो जाएंगे इसलिए सकारात्मक बदलाव लाने के लिए मैं सक्रियता को तीसरे पक्ष में रूप में रखता हूं। भारत के130 करोड़ लोग स्वच्छता और पर्यावरण के लिए सक्रिय है और बढ़ चढ़कर काम कर रहे हैं। देश में 8.5 करोड़ों की पहली बार शौचालय तक बनी है और 40 करोड़ से अधिक भारतीयों को अब खुले में शौच करने की आवश्यकता नहीं है।

स्वच्छता का दायरा 39% से बढ़कर 95% हो गया है। प्रकृति प्रवेश पर दबाव कम करने का ऐतिहासिक प्रयास है। उज्जवला योजना में भी हम यही सकता देखते हैं जिसकी वजह से घरों में होने वाला वायु प्रदूषण बहुत कम हुआ है क्योंकि भोजन पकाने की विधियों से सांस संबंधी रोगों में काफी बढ़ोतरी हो रही थी।

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