अमेरिका का आत्महंता कदम

अमेरिकी वाणिज्य विभाग के आंकड़े बता रहे हैं कि खाद्य, औद्योगिक आपूर्ति और मोटर वाहनों के निर्यात में गिरावट से उसका अंतरराष्ट्रीय व्यापार घाटा अगस्त में बढ़कर 75 पॉइंट 8 अरब डालर हो गया।

जो हाल के 6 महीनों में एक रिकॉर्ड है वैश्विक मीडिया की नजर में यह सब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ट्रेड वार प्रेम का नतीजा है। जिसने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को नीचे की ओर धकेल दिया है। आंकड़ों ने वाशिंगटन के नीति नेताओं के सामने अजीब सी स्थिति उत्पन्न कर दी है।

क्योंकि कहा जाने लगा है कि व्हाइट हाउस हालात को समझ नहीं पा रहा ताजा आंकड़ों को देखकर में कई कंपनियां ने तीसरी तिमाही के अपने अनुमानों में कटौती की है यूरोपियन सेंट्रल बैंक ने चेताया है कि अमेरिका ने अन्य देशों से भी ट्रेड वार शुरू कर दिया है तो इससे सबसे ज्यादा नुकसान उसी को होगा।

बैंक का अनुमान है कि इससे अमेरिका विकास दर में 2% से ज्यादा अंकुर कमी आ सकती है बैठा है कि नहीं पाएगा उसके विशेषज्ञों ने चीन को समझने में भूल की चीन तो अब के लिए तैयार बैठा था सच यही है कि आज एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर है अमेरिका के सामने है फ़िलहाल लगता तो नहीं कि ताजा आंकड़ों के बावजूद वाशिंगटन अपनी नीति और आर्थिक मंदी और ज्यादा आलोचना झेलनी है हमारा तो मानना है कि अर्थशास्त्र के नियमों पर भरोसा किया जाना चाहिए और दोनों के लिए घातक होता है।

आज यदि चीन इसकी कीमत चुका है तो अमेरिका को कुछ ज्यादा ही कीमत चुकानी पड़ रही है वह व्यापार घाटे की प्रकृति को समझ ही नहीं पा रहा उसने अपनी जनता को भी भ्रम में रखा है चीन ट्रेड वार को क्या समझता है इसके पक्ष में नहीं है बीजिंग की हमेशा कोशिश रही है कि मौका देखकर शांत रहें और हालात से पैदा होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिश करें। उम्मीद की जानी चाहिए कि चीन का रवैया समय की परीक्षा में फिर खरा साबित हो गया।

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