ऑतो में पाचन- आंतों में पाचन के लिए तीन प्रकार का रस होता है
पित्त रस - इस रस का निर्माण शरीर का सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत में होता है मानव के यकृत का वजन डेढ़ किलो से 2 किलो ग्राम तक होता है। लेकिन इस रस का संचय पित्ताशय में होता है । इस रस में कोई इंजॉय नहीं होती है यह छारीय द्रव है। इसका पीएच मान 7. 6 से 8. 5 तक होता है यह आंतों को छारीय बनाता है। और वसा की अवशोषण में सहायता करता है और यह यह हानि कारक पदार्थों को बाहर करते हैं। यकृत में गड़बड़ी के कारण रक्त रक्त की मात्रा एक परसेंट से अधिक होने लगती है जिसके कारण पीलिया रोग हो जाता है।
अग्न्याशयी रस- इससे पूर्व पाचक रस कहा जाता है क्योंकि इसमें सभी प्रकार के खाद्य पदार्थों को पचाने वाली एंजाइम होती हैं जो इस प्रकार हैं।
ट्रिप्सिन- यह प्रोटीन का पाचन करती हैं।
ऐसे ही कुछ इंजाइम हैं जो कार्बोहाइड्रेट का पाचन करती हैं तथा वसा का पाचन करते हैं और वसा का वास्तविक पाचन आंत के ड्यूटीरियम भाग में होता है
आतीय रस- ऑत की दीवार में पाए जाने वाली ग्रंथियों से निकलता है यह हलके पीले रंग का छारीय द्रव होता है जिस का पी एच मान 7 से 8 होता है इसमें भोजन को पचाने वाले निम्न एंजाइम होते हैं।