सिक्ख गुरुओं का क्रम तथा समाज पर उनके द्वारा किए गए योगदान पर चर्चा करेंगे। भाग: 1

गुरू नानक देव:-

जन्म:- तलवंडी
मृत्यु:- करतारपुर डेरा बाबा
पिता का नाम:-  कालू जी
पत्नी का नाम:- सुलक्षणी
जाति:-  खत्री
उपाधि:-  हजरत रब्बुल मजीज
सिक्खों के प्रथम गुरु गुरुनानक थे। उन्होंने नानक पंथ चलाया। इन्हीं के शिष्य सिक्ख कहलाए। इब्राहिम लोदी के समकालीन थे इन्होंने अपने एक शिष्य लहना को अपना उत्तराधिकारी बनाया जो अंगद नाम से दूसरे गुरु बने।

अंगद (1539-1552ई.):-

सिखों के दूसरे गुरु अंगद गुरु नानक के शिष्य और जाति से खत्री थे । इन्होंने खादुर में गुरु गद्दी बनाई तथा गुरु नानक द्वारा चलाई गई लंगर व्यवस्था को नियमित कर दिया 
। गुरुमुखी लिपि का आविष्कारक अंगद को माना जाता है।

अमरदास (1552-1574 ई.):-

सिक्खों के तीसरे गुरु अमरदास, अकबर के समकालीन थे।
इन्होंने अपनी गद्दी गोइंदवाल में स्थापित किए । यहां पर उन्होंने एक बावड़ी का निर्माण कराया जिसके बारे में एक कहावत प्रचलित थी कि इसका पानी पीने से सभी रोग दूर हो जाते हैं इन्होंने नियम बनाया कि कोई भी व्यक्ति बिना लंगर में भोजन किए गुरु से नहीं मिल सकता।
  • गुरु अमरदास ने अपने उपदेशों का प्रचार-प्रसार करने के लिए 22 गद्दिओं को स्थापित किए और हर गद्दी में एक-एक महंत की नियुक्ति हुई थी।
  • ‎मुगल सम्राट अकबर इनसे मिलने स्वयं गोइंदवाल गए थे। अकबर ने अमरदास की बेटी बीबीभानी के नाम कुछ भूमि भी दे दिया था । अमरदास ने अपने दामाद व शिष्य रामदास को अपना उत्तराधिकारी बनाया ।

                 लेख अभी जारी है.........।

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