बहमनी साम्राज्य
बहमनीवंश की स्थापना मुहम्मद तुगलक के समय द्वितीय सिकन्दर की उपाधि धारण करके अबुल मुजफ्फर अलाउद्दीन हसन बहमनशाह (हसन गंगू) ने 3 अगस्त 1347 ई0 को किया।
सुनार की बेटी का युद्ध बहमनी शासक फिरोजशाह और विजयनगर के शासक देवराय प्रथम के बीच हुआ था।
शिहाबुद्दीन अहमद प्रथम (1422-46ई0) अहमदशाह बली या संत बली कहा जाता था। उसने गुलवर्गा के स्थान पर बीदर को अपनी राजधानी बनाया।
महमूद गवाँ का उत्कर्ष शम्सुद्दीन अहमद तृतीय (1463-82) के समय हुआ। वह ईरानी था। इसी शासक के समय में उसे फाँसी दे दी गयी।
सुल्तान शम्सुद्दीन अहमद तृतीय के समय में रूसी घोड़े का व्यापारी निकितिन 1470 में बीदर आया।
बहमनी वंश का अन्तिम शासक कलीमुल्लाह था।
बहमनी साम्राज्य का विखण्डन
बरार में सबसे पहले 1484 ई0 में अपनी स्वतंत्रता की घोषणा किया, किन्तु सबसे पहले स्वतंत्र बीजापुर हुआ।
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राज्य
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राजवंश
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संस्थापक
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वर्ष
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बीजापुर
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आदिलशाही
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युसुफआदिल शाह
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1489 ई0
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अहमदशाह
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निजामशाही
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मलिक अहमद
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1490 ई0
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बरार
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इमादशाही
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फतह उल्ला
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1490 ई0
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गोलकुण्डा
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कुतुबशाही
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कुली कुतुबशाह
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1512 ई0
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बीदर
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बरीदशाही
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अमीर अली वरीद
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1519 ई0
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बरार और अहमदनगर के संस्थापक हिन्दू से परिवर्तित मुसलमान थे
चाँद बीबी अहमद शासक हुसैन निजाम शाही की पुत्री थी। उसका विवाह बीजापुर के शासक अली आदिलशाह से हुआ था।
गोल गुम्बद का निर्माण मुहम्मद आदिलशाह ने बीजापुर में करवाया था।
इब्राहिम द्वितीय आदिलशाही वंश महानतम शासक था उसकी प्रजा ने उसे जगतगुरू तथा अबला बाबा (निर्धनों का मित्र) की उपाधि प्रदान की। इसने अपनी पुत्री का विवाह शाहजादा दानियाल से कर दिया था। उसने संगीत गं्रथ किताब-ए-नौरस की रचना किया। फरिश्ता ने उसी के संरक्षण में अपने ग्रन्थ तारीखे-फरिश्ता की रचना किया।
सिकन्दर आदिलशाह बीजापुर का अंतिम शासक था।
अबुल हसन गोलकुण्डा का अन्तिम शासक था।
बीदर के संस्थापक अमीर अली वरीद को दक्कन की लोमड़ी कहा जाता है।
बरार को अहमदनगर और बीदर को बीजापुर ने अपने राज्य में मिला लिया था।