4.रामदास (1574-1581):-
सिक्खों के चौथे गुरु रामदास अकबर के समकालीन, व अमरदास के दमाद थे। अकबर ने इन्हें 500 बीघा भूमि प्रदान किया इसी जमीन पर इन्होंने अमृतसर नामक शहर बसाया। पहले इस नगर का नाम रामदास पुर था।
इन्होंने नगर निर्माण में धन की आवश्यकता के कारण अपने अनुयायियों को पैसा वसूलने के लिए भेजा इन अनुयायियों को रामदासी कहा जाता था। रामदास ने अपने तीसरे पुत्र अर्जुन देव को उत्तराधिकारी नियुक्त करके गुरु का पद पैतृक बना दिया।
अर्जुन देव (1581-1606ई.)
सिक्खों के पांचवे गुरु अर्जुन देव को सच्चा बादशाह भी कहा जाता है। इन्होंने रामदास पुर में अमृतसर व संतोषसर नामक तालाब निर्माण करवाए । अमृतसर तालाब के मध्य में 1589 ईस्वी में हरमंदिर साहब का निर्माण करवाया इसकी आधारशिला कादरी संप्रदाय के प्रसिद्ध संत मियां मीर द्वारा रखा गया था।
अर्जुन देव ने तरनतारन व करतारपुर नामक नगर का निर्माण करवाया। 1595 ई. में ब्यास नदी के तट पर गोविंदपुर नामक शहर बसाया। इन्होंने नगर के निर्माण के लिए अपने अनुयायियों को पैसा वसूलने के लिए भेजा जो मंसद व मेउरा कहे जाते थे।
इन्होंने अनिवार्य आध्यात्मिक कर लेना शुरू किया तथा अपने शिष्यों से कहा कि अपनी आय का 1/10 भाग गुरु को अर्पित करें। 1604 ईस्वी को इन्होंने आदि ग्रंथ की रचना किए था। खुसरो को समर्थन देने के कारण जहांगीर ने 1606 ईसवी में इन्हें मृत्युदंड दे दिया।
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