उन्नीसवीं सदी के समाचार पत्र--
किसी भी भारतीय द्वारा अंग्रेजी में प्रकाशित समाचार पत्र गंगाधर भट्टाचार्य का सप्ताहिक बंगाल गजट था । 1816 इसवी में इसका प्रकाशन शुरू हुआ था।
राजा राममोहन राय ने प्रगतिशील राष्ट्रीय प्रवृत्ति के समाचार पत्रों का प्रकाशन प्रारंभ किया इन्होंने 1821 ईसवी में बंगाली में 'संवाद कौमुदी' तथा 1822 ईसवी में फारसी में 'मीरात उल अखबार' का प्रकाशन किया राजा मोहन राय को राष्ट्रीय प्रेस की स्थापना का श्रेय दिया जाता है । इन्होंने समाचार पत्र के माध्यम से समाज सुधार का तो प्रचार किया ही, साथ ही इनको धार्मिक तथा दार्शनिक समस्याओं पर विचार तथा विवाद का माध्यम भी बना दिया । अंग्रेजी में इन्होंने ब्रह्म निकल मैग्नीज भी निकालना शुरू किया। राजा राममोहन राय के सामाजिक तथा धार्मिक विचारों का विरोध करने के लिए 1822 ईस्वी में चंद्रिका का प्रकाशन शुरू हुआ । 1822 ईस्वी में मुंबई में गुजराती भाषा में दैनिक मुंबई समाचार पत्र निकालने लगा।
1857 ईस्वी के बाद समाचार पत्र की स्थिति---
1857 ईस्वी के विद्रोह के बाद पत्रकारों को राष्ट्रीयता के आधार पर विभाजित किया जाने लगा । भारतीय भाषा में प्रकाशित समाचार पत्रों में जातिय गौरव भरा होता था । इनको भारतीय समाचार पत्रों की तुलना में आधुनिक सुविधा प्राप्त हुई । इस समय अंग्रेजों द्वारा संपादित समाचार पत्रों में एकाध को छोड़कर सरकार की आलोचना नहीं की जाती थी यह समाचार पत्र सरकार के समर्थक बन गए थे।
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