मी टू की ताकत

मिठू ऐसा खामोश अभियान है जिसके असर और स्वीकार्यता ने लंबे समय से देश को अपने भीतर दबाए बैठी स्त्री को स्वर दिया स्वाभाविक है। इस पर विपरीत प्रतिक्रियाएं भी आनी ही थी लेकिन इस बात का कोई मतलब नहीं कि किसी महिला ने शिकायत 10 साल बाद क्योंकि या कि ऐसे अभियान का दुरुपयोग भी होगा नहीं बुलाना चाहिए कि स्त्री के साथ शोषण के मामले में शिकायत और उसका असर दोनों ही आसान नहीं है और कई बार उल्टा उसे ही शिकार बनाना पड़ता है इसलिए शिकायत की अवधि पर बहस बेमानी है असल बात यह है कि महिला सशक्तिकरण के इस दौर में मी टू जैसे अभियान का सिर्फ और सिर्फ स्वागत होना चाहिए।

स्त्री को इतनी ताकत मिलनी चाहिए कि आने वाले वक्त में कोई उनसे ऐसे समझो तो को सोचने की भी जरूरत ना करें यही वक्त का तकाजा है कि सभी सभ्य समाज की निशानी भी यह अभियान दुनिया को कितना बदलेगा बात की बात है इसे आईना तो दिखा ही रहा है बदलाव की शुरुआत भी तो आईने से ही होती है धरा का भरके ने सोचा भी नहीं होगा कि महिलाओं की यौन शोषण के खिलाफ अपनी चीज पलकोवा मीठो नाम देने जा रही हैं वह 1 दिन ना सिर्फ वैश्विक स्तर पर बड़ा अभियान वर्ण महिला यौन उत्पीड़न के खिलाफ सशक्त हथियार बन जाएगा। दरअसल हॉलीवुड अभिनेत्री जुड़ने की थी जब उन्होंने बॉलीवुड के 1 बड़े निर्माता हार्वे वेनस्टीन पर काम देने के एवज में यौन शोषण का आरोप लगाया था।

सोशल मीडिया पर क्या की हॉलीवुड की कई अभिनेत्रियों ने छोड़ दी जो लंबे समय से ऐसे दबाए बैठी थी बाद में अमेरिकी सोशल  एक्टिविस्ट तराना बर्के ने 2006 की शुरुआत में इन स्वीकारोक्ति से निकले एक शब्द को मुहावरा मानकर पकड़ा और मी टू हैशटैग के साथ ऐसी शिकायतें टि्वटर पर साझा करने शुरू कर दी 2017 में अमेरिकी अभिनेत्री एलिसा मिलानो के लगातार टि्वटर की संदेशों ने इसे रफ्तार दी अब तो या अभियान और उत्पीड़न की शिकार दुनिया भर की महिलाओं की आवाज ही बन चुका है।

                                 हालांकि पिछले साल भारतीय सोशल मीडिया पर इसकी दस्तक के बाद इसे मजाक का मुद्दा भी बनाया गया लेकिन अभी एक बड़ा मंच बन चुका है। इसमें कुछ ऐसे स्वरों को भी मुखर करने का काम किया जिसे शायद अन्यथा ऐसी अपेक्षा संभव ही नहीं थी। ताजा स्वर तनुश्री दत्ता की शिकायत के फिर सामने आने के साथ मुखर हुआ है जिसमें 10 साल पहले नाना पाटेकर पर शूटिंग के दौरान अपनी हरकतों से उन्हें असहज करने का आरोप है।

अभियान की धमक राजनीति के गलियारे तक पहुंची है। एक वरिष्ठ पत्रकार ने पूर्व में संपादक रहे एक मौजूदा केंद्रीय मंत्री पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया है। ऐसी शिकायतों को कई और बड़े नाम भी आ रहे हैं जो शर्मनाक है।

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