गरीबी के विरूद्ध सफलता

विश्व बैंक की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक अब तक के दर्ज इतिहास में पहली बार भयानक गरीबी में जी रहे लोगों की संख्या का अनुपात प्रत्येक 10 व्यक्ति में एक से भी कम रह गया है अभी कुछ दशक पहले तक 10 में से चार लोग गुरबत की जिंदगी जीने को मजबूर थे विश्व बैंक ने रोजाना 1.9 डालर से कम आमदनी वालों को भयानक गरीबी की दायरे में रखा है मुफलिसी से उबरने की यह गति इतनी तेज है कि कई विशेषज्ञ अब यह कहने लगे हैं कि चरम गरीबी से जल्दी ही पूरी तरह से मुक्ति मुमकिन है।

ऐसे आकलन के पीछे की वजह यह है कि काफी सारे देशों ने अपने आप बड़ी बड़ी संख्या में लोगों को बदतर जीवन स्थितियों से उबारा हैं। बहुत सारे गरीबों ने यह सीखा है कि उनकी भी दुर्दशा दूर हो सकती है और उनकी सोच बदली है।

विश्व बैंक और तमाम अन्नदाता एजेंसियों का लक्ष्य भयानक गरीबी में जी रहे लोगों की संख्या 2030 तक 3 फीसदी करने का है, लेकिन दुनिया के आधे से ज्यादा देश उस लक्ष्य को अभी भी हासिल कर चुके हैं।

एशिया खासकर चीन, भारत और इंडोनेशिया ने इस मोर्चे पर पिछले 25 साल में जबरदस्ती की है। साल 2000 में दुनिया भर के मुल्कों ने यह लक्ष्य तय किया था कि साल 2015 तक भयानक गरीबी के शिकार लोगों की आबादी को 1990 के स्तर से आधी संख्या पर ले आएंगे और इस दिशा में उनके साझा प्रयास कितने अनूठे रहे की तय अवधि से 5 वर्ष पहले ही या लक्ष्य हासिल हो गया एक आकलन के मुताबिक हर 1.2 सेकंड में दुनिया का एक गरीब अपनी भयानक गरीबी से निजात पाने लगा है आज के ज्यादातर गरीब अफ्रीकी देशों में रहते हैं 1990 की 54 फ़ीसदी की दर घटकर अब वहां 41 फ़ीसदी रह गई है लेकिन एक विरोधाभास की वह दिखा है वहां भयानक गरीबी के दायरे में जीने वालों की तादाद बढ़ी है और इसके लिए वहां की जनसंख्या वृद्धि की उच्च दर जिम्मेदार है स्थिति यह है कि इस साल की शुरुआत में नाइजीरिया में भयानक गरीबी में जीने वाले लोगों की आबादी के मामले में विशाल जनसंख्या वाले देशों को भी पीछे छोड़ दिया

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