किसी भी व्यवसाय पर्यावरण का निर्माण विभिन्न पर्यावरणीय घटकों के समावेश से होता है। यह व्यवसायिक पर्यावरण संबंधी घटक व्यवसायिक योजना और नीतियों को अत्यधिक प्रभावित करते हैं इसमें मुख्य रूप से अर्थव्यवस्था की संरचना, सामाजिक रचना, राजनीतिक प्रणाली , उपभोक्ता की मांग इत्यादि शामिल होते हैं। इनमें से कुछ प्रमुख संगठनों का विश्लेषण इस प्रकार कर सकते हैं।
आर्थिक पर्यावरण
यह व्यवसायिक पर्यावरण का महत्वपूर्ण घटक है। किसी भी व्यवसाय को कार्य संचालन के लिए विभिन्न आदान- प्रदान करने होते हैं और अंतिम उत्पाद के रूप में वस्तुएं तथा सेवाएं समाज को वापस करने होते हैं। उदाहरण के लिए वस्तुओं के निर्माण के लिए जो कच्ची वस्तु चाहिए होती है, उसके क्रय के लिए एक या दो आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना पर्याप्त नहीं है, इसलिए इस दशा में विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर रहना भविष्य में उसे आपूर्तिकर्ताओं द्वारा होने वाले शोषण से मुक्त रखती है , क्योंकि किसी भी व्यवसाय की सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि उसके विभिन्न आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भर या आश्रित रहने का स्तर क्या है, अर्थात यदि व्यवसायिक संगठन के आपूर्तिकर्ताओं की तुलना में श्रेष्ठतर स्थिति है तो वह अपनी शर्तों पर आपूर्ति प्राप्त कर सकेगा।
इसके दूसरी ओर एक व्यवसायिक उपक्रम अपने ग्राहकों के उपभोग के लिए वस्तुओं और सेवाओं का उत्पादन करता है। व्यवसाय की मांग और पूर्ति की स्थिति ग्राहकों के साथ संबंध का निर्धारण करती है।
सामाजिक पर्यावरण
सामाजिक वातावरण किसी भी व्यवसाय के संचालन को अत्याधिक प्रभावित करता है, क्योंकि यह समाज ही है, जिससे व्यवसाय उत्पादन के लिए विभिन्न आदान (Input) प्राप्त करता है तथा अंतिम उत्पाद (output) के रूप में समाज को वापस लौटाता है किसी भी देश और समाज की जनसंख्या में प्रवृतियां व्यक्तिगत आवश्यकताएं एवं सांस्कृतिक घटक सामाजिक पर्यावरण के अभिन्न अंंग होने के कारण व्यवसाय को किसी न किसी रूप में प्रभावित अवश्य ही करते हैं। पिछले कुछ वर्षों में नई सामाजिक मान्यताओं की स्थापना हुई है। व्यवसायिक दर्शन के निर्माण में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
वैधानिक पर्यावरण
यह कहा जाता है किसी भी व्यवसाय का वैधानिक पर्यावरण राजनैतिक पर्यावरण के शाखा या अंकुर होता है। सत्ता पक्ष वाली राजनीतिक पार्टी की विचारधारा पर आधारित अथवा जन- समाज के दबाव के कारण व्यवसाय के प्रत्येक पहलू के नियम और नियंत्रण के लिए अनेक विधान पारित किए जाते हैं। कानून द्वारा सामाजिक कल्याण एवं जन आकांक्षाओं के लिए व्यवसाय क्रियाओं पर अनेक प्रतिबंध लगाए जाते हैं। इसके अलावा व्यवसायिक वैधानिक वातावरण के क्षेत्र अत्यंत व्यापक है। इसके द्वारा व्यवसाय के आर्थिक जगत में व्यवसाय के विभिन्न पहलुओं पर नियंत्रण रखा जाता है। व्यवसाय के अलग-अलग पक्षों के लिए सरकार द्वारा समय समय पर अलग-अलग अधिनियम का निर्माण किया जाता है। विधान मंडलों समितियों तथा आयोगों का गठन किया जाता है। इसके अतिरिक्त देश के संविधान के अधीन न्यायालयों एवं न्यायाधिकरणों की स्थापना की जाती है, जो सदैव इस बात का प्रयास करते हैं की कानून की रक्षा हो तथा पीड़ित पक्षकार को न्याय मिले।
नैतिक पर्यावरण
किसी भी व्यवसाय को समाज में विभिन्न नैतिक स्तरों का पालन करना होता है। इस जटिल व्यावसायिक परिवेश में नैतिक सिद्धांत एवं सहितएंँ ही प्रबंधकों के व्यवहार का मार्ग दर्शन करने में सहायक होती हैं। उदाहरण के लिए विश्व के सफलतम देशों में गिने जाने वाले राष्ट्रों, जापान , अमेरिका, जर्मनी ने व्यवसायिक नीतिशास्त्र के सिद्धांतों के आधार पर ही अंतरराष्ट्रीय व्यापार क्षेत्र में सफलताएंँ प्राप्त की है।