दक्षिण भारतीय राज्य

जिसमें संपूर्ण भारत में मौर्य अपना विस्तृत साम्राज्य स्थापित कर रहे थे ठीक उसी समय सुदूर दक्षिण में कृष्णा और तुंगभद्र नदियों के आसपास तीन छोटे-छोटे राज्य अस्तित्व मेथी पहला पांड्य दूसरा चोल तथा तीसरा चेर वंश था।

इस कॉल की जानकारी हमें उस समय में हुई 3 संगम ओ से प्राप्त साहित्यिक कृतियों से हुई है इन्हें परिषदों या संगम ओं का गठन पांड्य राजाओं के संरक्षण में किया गया था। पांडवों के संरक्षण में तीन संगमओं का गठन किया गया था।

संगम संस्कृत भाषा का शब्द है य कृष्णा एवं तुंगभद्रा नदियों की तलिमकम् प्रदेश में तलिम कवियों एवं विद्वानों का मिलन था।

पांडेय वंश- इस वंश की राजधानी मदूरै थी। इस वंश का सबसे पहले वर्णन मेगस्थनीज ने किया था इसके अनुसार पांड्य वंश की राजधानी मोतियों के लिए प्रसिद्ध थी और इस का शासन एक स्त्री के हाथ में था पांड्य शासकों के रोम साम्राज्य के साथ व्यापारिक संबंध थे एवं उन्होंने रूम सम्राट आगस्टस  के दरबार में अपने राजदूत भेजे ।

चोल वंश

        इस वंश का साम्राज्य चोलामंडलम या कोरोमंडलं ं कहलाता था। इसकी इसकी राजधानी कावेरीपट्टनम पुहार थी उरई कपास के व्यापार का एक प्रमुख केंद्र था चोल राजा इलेरा श्रीलंका को जीतकर वहां 50 वर्षों तक शासन किया कैरी कॉल इस वंश का प्रमुख एवं प्रसिद्ध शासक था उनकी राजधानी तथा आय का प्रमुख स्रोत कपास का व्यापार था चोल शासक एक क्षण नौसेना भी रखते थे।

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