राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग को संवैधानिक दर्जा प्रदान करने वाले 123 वे संविधान संशोधन विधेयक को 11 अगस्त ,2018 को रास्र्टपति रामनाथ कोविंद की मंजूरी प्राप्त हो गई।रास्र्टपति कि स्वीकृति के साथ ही इस विधेयक ने अधिनियम (102 वाँ संसोधन) का रूप ले लिया।
कानून बन जाने से अन्य पिछड़ा वर्ग को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग के बराबर अधिकार मिल जाएंगे।विदित है कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन 1993 में किया गया था।
अधिनियम की धारा 3 के अनुसार कुल 5 सदस्यों वाले इस आयोग में एक अध्यक्ष ,उपाध्यक्ष और तीन सदस्य होंगे,जिनमे से कम से कम एक महिला होगी।
यह आयोग एक स्वायत्त संस्था के रूप में कार्य करेगा तथा ओबीसी के उत्थान के उपाय करने के साथ साथ उनसे जुड़ी शिकायतो की जांच भी करेगा।