आर्थिक नीति और उसका व्यापक स्वरूप

यह बात सत्य है कि आजादी के तुरंत बाद देश के अंदर आर्थिक नीति के निर्माण के लिए कोई स्पष्ट नीति एवं संवैधानिक व्यवस्था नहीं थी और इसलिए भी आजादी के बाद अनेक क्षेत्रों में विशेषकर आर्थिक इतिहास में व्यापक कदम उठाए गए थे। यही कारण है जिसके फलस्वरूप हमारे देश में आजादी के बाद से आज तक विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से आम आदमी के जीवन स्तर में सुधार और देश के विकास का कार्य किया जा रहा है। आर्थिक नीति के माध्यम से ही देश के विभिन्न महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभिन्न आर्थिक नीतियों का क्रियान्वयन किया जाता है। उदाहरण के लिए:-

  1. देश की औद्योगिक नीति
  2. उद्योगों के लिए अनुज्ञापालन नीति
  3. आयात - निर्यात के लिए देश की व्यापार नीति
  4. देश की कृषि एवं खाघान्न के लिए नीति
  5. देश की राजकोषीय एवं कर नीति
  6. मौद्रिक नीति
  7. उद्योगों के नियमन एवं निमंत्रण की नीति
  8. सार्वजनिक व्यय एवं ऋण नीति
  9. आर्थिक मूलभूत ढांचे के लिए नीति
  10. आय रोजगार एवं मूल्य नीति
  11. घाटे की वित्त व्यवस्था की नीति
  12. देश के आर्थिक नियोजन योजनाएं उनका क्रियान्वयन एवं संचालन
  13. पंचवर्षीय योजना की संरचना उसके उद्देश्यों का निर्धारण इत्यादि

उपरोक्त नीतियों का निर्माण सरकार द्वारा विभिन्न समय पर किया गया है और इतना ही नहीं समय-समय पर जैसेे-जैसे लोगों की आवश्यकता और हमारे देश की परिस्थितियां बदलती गई, वैसेे-वैसे इन नीतियों में परिवर्तन भी किए गए। 

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