भारतीय समाचार पत्रों का इतिहास (history of Indian press)भाग-3-

अंग्रेजों द्वारा संपादित पत्र -अंग्रेजों द्वारा संपादित प्रमुख पत्रों में 'टाइम्स ऑफ इंडिया'1862 ईस्वी से, स्टेट्समैन 1876 से , फ्रेंड्स आफ इंडिया तथा इंग्लिश मैन कोलकाता से , 'मद्रास मेल' मद्रास से प्रकाशित होते थे। इन समाचार पत्रों में इंग्लिश में सर्वधीक रूढ़िवादी एवं प्रतिक्रियावादी था । जबकि स्टेट्समैन उदारवादी विचार के लिए प्रसिद्ध था। इस काल में भारतीयों ने ना केवल अंग्रेजी में बल्कि विभिन् विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं मैं भी समाचार पत्र बड़े पैमाने पर निकालने शुरू किए । प्रख्यात समाज सुधारक ईश्वर चंद्र विद्यासागर ने 1859 ईसवी में 'सोम प्रकाश' का प्रकाशन एक सप्ताहिक पत्रिका के रूप में आरंभ किया। इस समाचार पत्र ने नील आंदोलन में किसानों के हितों का जोरदार समर्थन किया । इसी समाचार पत्र के विरुद्ध लॉर्ड लिटन का वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट 1878 ईस्वी में लागू किया गया था । सोम प्रकाश की स्थापना के कुछ वर्षों बाद 'हिंदू पैट्रियोट' को भी विद्यासागर ने ले लिया। इस समाचार पत्र के संपादक क्रिस्टोदास पाल थे । उन्होंने भारतीय पत्रकारिता का राजकुमार कहा जाता है। वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट से बचने के लिए 1878 ईस्वी में यह अंग्रेजी सप्ताहिक में परिवर्तित हो गया । 1891 ईसवी तक आते-आते यह दैनिक पत्र के रूप में परिवर्तित हो गया । वीर राघवाचारी ने 1878 इसवी में मद्रास में अंग्रेजी भाषा में हिंदू का प्रकाशन सप्ताहिक के रूप में प्रारंभ किया। 1881 ईसवी तक आते आते यह दैनिक पत्र के रूप में परिवर्तित हो गया । एंग्लो इंडियन पत्रकार राबर्ट नाइट ने 1859 ईस्वी में 'बॉम्बे टाइम्स' खरीद लिया तथा 1867 ईसवी में वे टाइम्स आफ इंडिया के संपादक बने सुरेंद्रनाथ बनर्जी ने 1879 ईसवी में बंगाली का संपादन अंग्रेजी में प्रारंभ किया । कोलकाता में हिंदी साहित्य के रूप में भारत मित्र'का प्रकाशन बालमुकुंद गुप्त ने किया । हालांकि हिंदी का पहला समाचार पत्र 'उदंत मार्तंड' था । इसका प्रकाशन 1826 ईस्वी में जुगल किशोर ने किया था। फिरोजशाह मेहता ने बांबे क्रॉनिकल की स्थापना की। इसका मुख्य उद्देश कांग्रेस के सूरत विभाजन के बाद जनता तक अपनी बात पहुंचाना था । डॉक्टर एनी बेसेंट ने 1916 ईस्वी में 'न्यू इंडिया ' का प्रकाशन किया इसका पुराना नाम मद्रास स्टैंडर्ड था । इन्होंने एक अन्य समाचार पत्र 'कामनविल' का प्रकाशन किया। गांधी जी ने 1919 ईस्वी में यंग इंडिया तथा 1933 ईस्वी में हरिजन का प्रकाशन किया । मोतीलाल नेहरू ने इलाहाबाद से 1919 ईस्वी में अंग्रेजी दैनिक इंडिपेंडेंस का प्रकाशन किया । 1910 से 1920 ईसवी के मध्य उर्दू पत्रिका के क्षेत्र में भी विकास हुआ 1912 ईस्वी में अब्दुल कलाम आजाद ने अल हिलाल तथा 1913 ईस्वी में अल बिलाल का प्रकाशन कोलकाता से किया । 1913 ईस्वी में गदर पत्र का प्रकाशन सैन फ्रांसिस्को से लाला हरदयाल में उर्दू में प्रकाशित किया था । भारतीयों पर अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए विभिन्न प्रकार के अधिनियम लाए गए इस दिशा में पहल सर्वप्रथम लार्ड वेलेजली ने की उन्होंने 1799 में प्रेस नियंत्रण अधिनियम पारित किया । जिसके तहत समाचार पत्र के संपादक मुद्रक और स्वामी का नाम स्पष्ट रूप से छापना पड़ता था तथा प्रकाशन को प्रकाशित किए जाने वाले सभी तत्वों को सरकार के सचिव के सम्मुख पूर्व पत्र जांच लिए भेजा जाता था । 

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