मौर्योत्तर काल के विदेशी राजाओं का शासन

पश्चिमोत्तर भारत में आर्यों के स्थान पर मध्य एशिया से आए कई राजवंशों में अपने सत्ता कायम की इस काल में भारतीय क्षेत्रों पर यूनानी शक पल्लव तथा कुछ कुषाणों का हमला हुआ।

भारत में यवन राज्य -  उत्तर पश्चिम से पश्चिमी विदेशियों के आक्रमण और उत्तर काल की सर्वाधिक संपूर्ण घटना थी। और महत्वपूर्ण हुई थी इनमें सबसे पहले आक्रमण कारी बैक्ट्रिया के ग्रीक थे जिन्हें यूनानी कहा जाता था। और जिन्हें यवन के नाम से भी जाना जाता था मगर उत्तर काल में भारतीय सीमा से सर्वप्रथम प्रवेश करने का श्रेय डेमेट्रियस प्रथम को है उन्होंने 183 ईसा पूर्व में पंजाब के कुछ क्षेत्रों को विजिट कर तक्षशिला  को अपनी राजधानी बनाया था। जो डेमेट्रियस प्रथम ने ्््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््््के उपरांत यूक्रेटाइड्रस ने  भारत के कुछ क्षेत्रों को विजिट कर तक्षशिला को अपनी राजधानी बनाया था।

मीनाण्डार  या मिलिंद सर्वाधिक प्रसिद्ध शासक था जिसने भारत में यूनानी सत्ता को स्थायित्व प्रदान किया था। प्रसिद्ध बौद्ध दार्शनिक नागसेन के साथ मिलिंद के द्वारा किए गए वाद विवाद का विस्तृत वर्णन  मिलिंदपान्हो में है। इसके इस मिलिंद ने बौद्ध धर्म अपना लिया।

आगे हम इसमें यूनानी संपर्क का प्रभाव देखेंगे........

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