मुगलवंश-1

मुगलवंश

      मुगलवंश का संस्थापक जहीरूद्दीन मुहम्मद बाबर था।

      बाबर ने 1507ई0 में बादशाह की उपाधि धारण की। बादशाह से पूर्व बाबर मिर्जा की पैतृक उपाधि धारण करता था।

      बाबर को भारत पर आक्रमण करने का निमंत्रण पंजाब के अफगान सरदार दौलत खाँ लोदी एवं मेवाड़ के राणा सांगा ने दिया था।

      बाबरनामा या तुजुके-बाबरी (तुर्कीभाषा) का फारसी में अनुवाद सर्वप्रथम अकबर के समय पायन्दा खाँ ने किया। इसके तुरन्त बाद 1590 में अब्दुररहीम खानखाना ने फारसी में अनुवाद किया। मिसेज बैवारिज ने तुर्की भाषा से सीधे अंग्रेजी भाषा में अनवुाद किया। इसका फारसी भाषा से अंग्रेजी में अनुवाद सर्वप्रथम लीडन, अर्सकिन व एल्किंग ने कियां

      बाबर ने 1519 ई0 बाजौर एवं भीरा पर आक्रमण किया। बाजौर के युद्ध में बाबर ने भारत में पहली बार किसी आक्रमण में तोपों एवं बन्दूकों का प्रयोग किया।

      भारा से बाबर ने अपना दूत मुल्ला मुर्सीद को इब्राहिम लोदी के पास भेजा था।

      निजामुद्दीन खलीफा ने एक षड़यन्त्र द्वारा हुमायूँ के स्थान पर मेंहदी ख्वाजा को सिंहासन पर बैठाना चाहता था।

      हुमायूँ का पहला आक्रमण (1531ई0) कलिंजर के शासक प्रतापरूद्र देव के विरूद्ध था।

      अबुल फजल ने हुमायूँ को इंसान-ए-कालिक कहा। कानून-ए-हुमायूँ से पता चलता है कि हुमायूँ ने प्रशासन में सहायता के लिए ‘अहल-ए-मुराद’ नामक वर्ग का गठन किया जिसमें मुख्यतः नर्तक एवं नर्तकियाँ शामिल थे।

-शेष अगले भाग में

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