पानीपत का प्रथम युद्व 21 अप्रैल 1526 ई0 को इब्राहिम लोदी एंव बाबर के बीच हुआ जिसमें बाबर विजयी हुआ था।
खानवा का युद्व 17 मार्च 1527 को राणा संागा एवं बाबर के बीच हुआ जिसमें बाबर विजयी हुआ।
इस युद्ध में बाबर ने अपने सैनिको का मनोबल बढ़ाने के लिए जिहाद का नारा दिया तथा मुस्लमानों पर लगने वाले तमगा कर की समाप्ति की घोषणा की।
चन्देरी का युद्व-29जून 1528 ई0 को मेदनीराय एवं बाबर के बीच हुआ, जिसमें बाबर विजयी हुआ। मध्ययुगीन इतिहास में यह पहला युद्ध था जो जल एवं थल दोनों पर लड़ा गया।
घाघरा का युद्व 6 मई 1529 को अफगानों एवं बाबर के बीच हुआ जिसमें बाबर विजयी हुआ।
बाबर को अपनी उदारता के लिये कलन्दर की उपाधि दी गयी।
1530 में आगरा में बाबर की मृत्यु हो गयी।
बाबर ने तुर्की भाषा में अपनी आत्म कथा बाबरनामा या तुजुक-ए-बाबरी की रचना की। इसका तुर्की से अंग्रेजी भाषा में अनुवाद मिसेज बैवरिज ने किया।
30 दिसम्बर 1530 को आगरा में हुमायूॅ सिंहासन पर बैठा।
राज्यारोहण से पहले हुमायॅू जमरूद का सूबेदार था।
1533 में हुमायूॅ ने दिल्ली के समीप दीन पनाह नामक नये नगर की स्थापना की थी।
-शेष अगले भाग में