शिवालिका की पहाड़ियों पर् सन 1621 में बसे नाहन की पृष्ठभूमि में 3 व्यक्तियों का नाम रहा। एक योद्धा राजकुमार, एक साधु, जो यहां पालतू शेर के साथ रहते थे और एक कुख्यात लुटेरा जो लूट का सामान यहां छुपाता था जब आधुनिकता यहां नहीं पहुंची थी उस दौर में 933 मीटर ऊंचाई पर ब से नाहन को हिमांचल का बैंगलोर कहा जाता था चार दर्जन राजाओं द्वारा शासित रहे इस शहर की बसावट प्रशंसनीय है ऐसा 1820 30 में राजा फतेह प्रकाश के शासन के दौरान नाहन पधारे लेफ्टिनेंट फ्रांसीसी वाइट ने भी लिखा था नाहन की खूब सुबह काफी शांत लगती है।
स्थानीय लोग समेत पर्यटक विला राउंड स्थित जागृत पार्क व छत्री के पास चीड़ के वृक्षों के सानिध्य में सुबह शाम सैर का मजा लेते हुए नजर आ जाते हैं और प्रदेश के सबसे पुराने बागों में से एक रानीताल बाग में भी बरसात के मौसम में धूम 3 धूम दे सकते बादल आपकी आवारगी को रोमांच से लबरेज कर देंगे रंग बदलते नैना विराम सूर्यास्त शाम को सुहानी बनाने में कसर नहीं छोड़ते शाम होते ही नाहन के दिल जो गांव में चहल-पहल जमा हो जाती है।
सन 1921 में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार जैसी फ्रेंच ना आए और यहां की सुंदरता से इतना प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी किताब ट्रैवल इन वेस्टर्न हिमालय में भी इसकी चर्चा की उसे पढ़कर पंजाब के तत्कालीन मुख्य सचिव कला प्रेमी 1963 में यहां आए यहां के तालाबों से प्रभावित हुए तालाबों के इस शहर में कई सारे तालाब हैं।
जिनमें से मुख्य हैं काली स्थान तालाब का तालाब रानी तालाब आदि कल आप से शहर की खूबसूरती तो बड़ी है साथी जमीन में नमी बरकरार रखने और सामाजिक उपयोगिता के साथ पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखने में भी यह सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं।