आभाहीन महाशक्ति की राह पर चीन

चीन के उदय पर क्रय केंद्रित प्रोस्पेक्ट के ताजा अंक में चीन और ब्रिटेन की दो महिला पत्रकारों के साथ ही भारतीय मूल के एक अंग्रेज और एक ऑस्ट्रेलियाई विद्वान ने चीनी अर्थव्यवस्था को मजबूती उसके राजनीति नेतृत्व की ताकत व दिशा के साथ साथ वहां के मध्यम वर्ग की नियति पर विस्तार से बातें की है जिसे पढ़ने के बाद कोई भी मान सकता है कि चीन का वैश्विक प्रबुद्ध बढ़ रहा है और इसे रोकना संभव नहीं है देश उसके इतिहास या राजनीति और विशेषज्ञता का मेरा कोई दावा नहीं है फिर भी वैश्विक दादागिरी की ओर बढ़ती इसकी तेज व आज फिर साल के इंसानों को पढ़ते हुए मेरा निष्कर्ष यही है। कि चीन ना तो बीसवीं सदी की महाशक्ति अमेरिका जैसा है और ना ही 19वीं सदी की महाशक्ति ग्रेट ब्रिटेन के जैसा हर पढ़ा लिखा इंसान जानता है कि सेक्सपियर और डी के जैसे ब्रिटिश लेखकों की आज भी दुनिया में कितनी मांग है माइकल फराडे और विज्ञान क्रांति को भी मानते हैं आमतौर पर नहीं होती है कि यदि ब्रिटिश आभामंडल का तीसरा और बड़ा स्रोत वह लोकप्रिय खेल भी रहे जिनका आवाज जन्मदाता है।

भारतीय उपमहाद्वीप के सर्वाधिक चर्चित खेल क्रिकेट के साथ ही टेनिस टेबल टेनिस और बैडमिंटन भी उसी की देन है एशिया और अफ्रीका में उपनिवेश बढ़ाने और जमीनी व समुद्री लड़ाई में विजय हासिल करने जाने के ब्रिटिश राजनीतिक व सेंड वर्चस्व को स्वीकार लिया जाएगा शाहिद और खेल-संसार के जरिए इस मान्यता को विस्तार मिला सच है कि द्वितीय विश्व युद्ध ने ग्रेट ब्रिटेन के ग्रेड पर भले विराम लगाया लेकिन उसका आभामंडल फिर भी बना ही रहा। ब्रेक्जिट के बाद की कमजोरी के बावजूद दुनिया भर का अभिजात वर्ग आज भी फाइनेंशियल टाइम्स आफ इकोनॉमिक्स को पड़ता और बीबीसी को सुनाता है 20 वीं सदी में अमेरिका ने ब्रिटेन से दुनिया की अग्रणी का छीन लिया या उसकी आर्थिक और शक्ति का नतीजा था तो उसकी सांस्कृतिक सामर्थ में मददगार बनी उसके पास हॉलीवुड की ताकत और जोश के साथ ही लोग के बीच से निकला था। नोबेल विजेताओं की पोथी तो विलियम एरनेस्ट हेमिंग्वे उपन्यासकार अमेरिका के पीछे साहित्य कला संगीत सिनेमा और खेलों का बड़ा योगदान रहा सवाल है कि चीन के पास क्या है? क्या कोई ऐसा चीज है जो चीनी आर्थिक और राजनीतिक प्रभुत्व को वैश्विक स्तर पर स्वीकार्य बनाने में सहायक बने कहां है उसका शेक्सपियर उसका जान लेना कौन है उसका कौन सा खेल बास्केटबॉल हो सकता है किसी निर्देशक के बारे में सोचा भी जा सकता है।

जो के आसपास भी ऐसा फिल्म अभिनेता जो लोगों के दिल दिमाग पर वैसा राज करें जैसा कभी चार्ली चैंपियन ने किया था। क्या कोई आजाद ख्याल पाकिस्तानी या उत्तर कोरिया भी रेडियो बीजिंग सी उत्सुकता से सुनता है। जिस तरह भारतीय आज भी बीबीसी को देखते सुनते हैं।

Posted on by