-
जन कल्याण की स्थिति में व्यापक असमानताएं मानव विकास की सतत प्रगति पर विपरीत असर डालती हैं। मानव विकास की दृष्टि से बहुत नीचे स्तर वाले देशों के समूह के निवासियों की तुलना में बहुत ऊंचे स्तर पर मौजूद देशों के निवासी 19 वर्ष अधिक जीते हैं और स्कूल में सात वर्ष अधिक बिताते हैं।
-
न्यू दिल्ली ,१५ सितम्बर २०१८ - मानव विकास सूचकांक के ताजा अनुक्रम के अनुसार, 189 देशों में से भारत एक पायदान ऊपर चढ़कर 130 पर पहुंच गया है।
-
पिछले वर्ष भारत का मानव विकास सूचकांक स्तर 0.640 है जिससे उसे मध्यम मानव विकास की श्रेणी में स्थान मिल गया है। 1990 और 2017 के बीच भारत का मानव विकास सूचकांक स्तर 0.427 से बढ़कर 0.640 हो गया जो करीब 50 प्रतिशत की वृद्धि है ।
-
मानव विकास सूचकांक में यह वृद्धि लाखों लोगों को गरीबी के दलदल से निकालने की भारत की उल्लेखनीय उपलब्धि का संकेत है।नार्वे, स्विटजरलैंड, ऑस्ट्रेलिया, आयरलैंड और जर्मनी इस सूची में सबसे ऊपर हैं, जबकि स्वास्थ्य, शिक्षा और आमदनी के मामले में राष्ट्रीय उपलब्धियों के मानव विकास सूचकांक के स्तर में नाइजेर, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, दक्षिण सूडान, चाड और बुरुंडी के अंक सबसे कम हैं।
-
दक्षिण एशिया में भारत का मानव विकास सूचकांक स्तर क्षेत्र के लिए 0.638 के औसत से ऊपर है। एक समान आबादी वाले देश बांग्लादेश और पाकिस्तान का स्थान क्रमश: 136 और 150वां है।