पुस्तपालन लेखाकर्म तथा अंकेक्षण

अंकेक्षण पुस्तपालन तथा लेखाकर्म से बहुत भिन्न है क्योंकि अंकेक्षण का पुस्तकों में लेखा करने अथवा खाते आदि बनाने में कोई भी संबंध नहीं है।

पुस्तपालन लेखकों में सभी व्यापारिक लेन-देन ओके लेखन की कला है। इसका संबंध मुख्य रूप से प्रारंभिक लेखक की बहनों से तथा खाता से होता है। पुस्तपालन का कार्य समानता जूनियर कर्मचारियों को सौंपा जाता है इन्हें अपना कार्य लेखापाल के अधीन उनकी देखरेख में करना होता है। इन्हें प्रायर किसी विशेष प्रकार की शिक्षा की आवश्यकता नहीं होती है।

वह साधारण क्या किसी विशेष प्रकार के प्रशिक्षित भी नहीं होते हैं पुस्तपालन संबंधी कार्य यंत्र पर होता है और आज कल आज कल कंप्यूटर द्वारा या कार्य होने लगा है। लेखाकर्म का आशय मुख्य रूप से पुस्तपालन द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक लेखों के विश्लेषण तथा उनका सारा बनाना अथवा अंतिम खातों को तैयार करने से है। पहले पुस्तपालन में तथा लेखाकर्म में कोई विशेष अंतर नहीं माना जाता था। परंतु व्यापार की उत्तर प्रगति तथा उनके आकार में वृद्धि के साथ-साथ दोनों में अंतर मानना अब आवश्यक हो गया है।

पुस्तपालन का क्षेत्र जहां से समाप्त होता है वहां से लेखाकर्म के क्षेत्र का आरंभ होता है और वास्तव में पुस्तपालन लेखाकर्म के अंतर्गत आता है। आंतों को तैयार करने का कार्य साधारणया अनुभवी कर्मचारियों को करना होता है जिन्हें अकाउंटेंट या लेखापाल कहते हैं। यह लेखापाल इस विषय में तथा विशेष प्रकार के प्रशिक्षित होते हैं इन्हें इस विषय का चित्र तथा विस्तृत ज्ञान होता है।

इन्हें खाता तैयार करने के बाद वर्ष के अंत में अंतिम खाते लाभ हानि खाता तथा चिट्ठा तैयार करना पड़ता है। साथ साथ उनका विश्लेषण भी करना पड़ता है सामान्य ज्ञान से या कार्य संभव नहीं उनका समुचित विश्लेषण करके उन्हें सारांश तैयार करना होता है। जो कि संसाधन के लिए भविष्य में समुचित नीति के निर्माण में तथा उसके संचालन में विशेष रूप से सहायक होते हैं।

प्रकृति एवं उद्देश्य के दृष्टिकोण से अंकेक्षण में तथा पुस्तपालन एवं लेखाकर्म में विशेष अंतर है अंकेक्षण की विशेषता है कि या मुख्य रूप से विशेषण तथा पश्चात दर्शी है जबकि लेखाकर्म वास्तव में संरचनात्मक है तथा इसका संबंध व्यापार के वर्तमान विभाग के लेखा से है। अंकेक्षण के अंतर्गत प्रस्तुत लेखों का विश्लेषण एवं विवेचना की जाती है। जिससे या सिद्ध हो सके कि वे सत्य हैं या नहीं अंकेक्षण का क्षेत्र वास्तव में वहां से आरंभ होता है।

जहां लेखाकर्म का कार्य समाप्त होता है एक अंकेक्षक अपना कार्य तब आरंभ करता है जबकि सभी खाते तथा विवरण तैयार कर लिए गए हो या लेखापाल मुख्य रचना करने वाला है एक अंकेक्षक विश्लेषण करता है

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