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मानव विकास की श्रेणियों में अनेक देश आगे बढ़ते जा रहे हैं। जिन 189 देशों में मानव विकास सूचकांक की गणना की जाती है उनमें से 59 आज बहुत ऊंचे मानव विकास समूह में हैं और सिर्फ 38 देश मानव विकास सूचकांक के सबसे निचले समूह में हैं।
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इससे आठ वर्ष पूर्व 2010 में यह आंकड़ा क्रमश: 46 और 49 देशों का था।भारत में 1990 की तुलना में आज स्कूल आयु के बच्चे 4.7 वर्ष अधिक स्कूल में पढ़ने की संभावना है, जबकि भारत के प्रतिव्यक्ति जीएनआई में 1990 और 2017 के बीच 266.6 प्रतिशत की भारी वृद्धि देखने को मिलती है।
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मानव विकास सूचकांक के औसत स्तरों में 1990 से उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर 22 प्रतिशत और सबसे कम विकसित देशों में 51 प्रतिशत हुई है ।किन्तु विश्व भर में जन कल्याण की स्थिति में भारी अंतर अब भी मौजूद है।
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मानव विकास सूचकांक से देशों के भीतर असमानता के स्तरों की तुलना की जा सकती है। यह असमानता जितनी अधिक होगी उस देश का मानव विकास सूचकांक उतना ही नीचे चला जाएगा।
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बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, स्वच्छ भारत और मेक इन इंडिया जैसी राष्ट्रीय विकास योजनाओं की सफलता और सबके लिए शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवा सुलभ कराने की पहल यह सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी कि मानव विकास के स्तर में वृद्धि का रुझान तेज हो।