ब्लड ग्रुप की खोज सन 1902 ईसवी में कार्ललैण्डस्टीनर ने किया था उन्होंने बताया सभी मानव के रक्त एक समान नहीं होते क्योंकि इनमें एंटीजन और एंटीबॉडी की भिन्नता होती हैं इस आधार पर ब्लड ग्रुप चार प्रकार के होते हैं जो इस प्रकार हैं।
रक्त का आदान-प्रदान - इसकी खोज 1994 में विनर नाम के वैज्ञानिक ने किया था यह एक विशेष प्रकार की एंटीजेन होता है और इसकी खोज अफ्रीका के रोसेस बंदर में किया गया था बाद में पता चला कि यह विश्व के 80% पर्सेंट व्यक्तियों में मिलता है और जिस व्यक्ति में मिलता है । आर एच पाज़िटिव और जिसमें नहीं मिलता है उसे आरएच निगेटिव कहते हैं या पॉजिटिव से नेगेटिव को नहीं दिया जा सकता है।
रक्त वर्ग की वंशागति-
इसकी खोज 1924 में वर्न स्टीन ने की थी। उन्होंने बताया कि माता-पिता से संतानों में पहुंचकर रक्त वर्ग का निर्माण करते हैं जो इस प्रकार हैं यदि माता एबी रक्त ग्रुप की है और पिता व रक्त ग्रुप का है तो उनकी संतानों में किस रक्त ग्रुप की होगी माता एबी पिता को भी है तो संताने AB group भी हो सकती हैं
रक्त से संबंधित बीमारियां
यह रोग तब होता है जब पिता आरएच प्लस तथा माता आरयच माइनस होती है। इस दंपति की दोनों पॉजिटिव ओर नेगेटिव संतानों की मृत्यु हो जाती है लेकिन पहली पाजिपा संतान को छोड़कर नेगेटिव संतानों में कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। इसमें चीन की गड़बड़ी होने के कारण आरबीसी के अंदर त्रुटिपूर्ण हीमोग्लोबिन बन जाता है जिसके कारण आरबीसी और ऑक्सीजन का ट्रांसपोर्ट नहीं कर पाती है और हानिकारकहानिकारक हो कर मरने लगते हैं आदमी की मृत्यु हो जाती है।