टपकन सिंचाई Drip Irrigation /Trickle Irrigation

इस प्रणाली में  स्तर पर या इससे ऊपर (लगभग 300 मिमी. ऊपर तक ) एक या एक से अधिक माइक्रोस्प्रेयर के जरिए सभी पौधों को सिंंचित किया जाता है। मुख्य तौर  पर अधिक तापमान और सीमित जल स्रोतों वाले क्षेत्रों में प्रणाली का उपयोग होता है। इस विधि में सिंचाई योग्य जल का समुचित उपयोग होता है वाष्पीकरण, अनुपयुक्त जल वितरण, रिसाव जल की अधिकता हो जाने की समस्याएं इसमें नहीं होती है। इस प्रणाली में किसी प्रकार के अवरोध को समाप्त करने के लिए जल को जाने की आवश्यकता होती है।

​ इस प्रणाली के लाभ

  • जल की कम हानि, जल की बचत ।
  • पौधे की वृद्धि को प्रोत्साहन मिलता है तथा अच्छी उपज होती है।
  • श्रम और ऊर्जा की बचत होती है।
  • खरपतवार वृद्धि को नियंत्रण करता है।
  • इस प्रणाली में मृदा अपरदन नहीं होता  है।
  • उर्वरक अनुप्रयोग की क्षमता में भी वृद्धि होती है।

 समस्याएं

  •  इस विधि के उपयोग में आने वाले उपकरणों के डिजाइन उसे लगाने का कार्य और संबद्ध संचालन में असुविधा होती है।
  • बालू मिट्टी के कण कंकड़ पत्थर और रासायनिक अवशेष के कारण छोटी नालियों में अवरोध उत्पन्न होता है।
  • गेहूं और धान जैसे निकटस्थ पौधरोपण के लिए यह विधि उपयोगी नहीं है।
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