भारत की मृदा

  • महाद्वीपीय भूपृष्ठ की सबसे ऊपरी असंगठित चट्टानी परत के भौतिक एवं रासायनिक परिवर्तन से मृदा का निर्माण होता है। यह आंशिक रूप से अपघटित कार्बनिक पदार्थ (5%) ,अकार्बनिक खनिज कणों (45%) तथा वायु, जल व जीव (50%) से मिलकर बनी होती है।
  • मृदा निर्माण को प्रभावित करने वाले कारकों में उच्चावच, जनक सामग्री, जलवायु, वनस्पति तथा समय प्रमुख कारक है। इसके अतिरिक्तत मानवीय क्रियाएँँ पर्याप्त सीमा तक मृदा निर्माण को प्रभावित करती है। विभिन्न भौगोलिक वातावरण मैं अलग अलग प्रकार की मृदा विकसित होती है।
  • इस संदर्भ में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् (I.C.A.R) द्वारा 1956 में किया गया कार्य सबसे महत्वपूर्ण है। (I.C.A.R) द्वारा संरचनात्मक मृदा और खनिज मृदा के रंग व संसाधनात्मक महत्व को ध्यान में रखते हुए भारतीय मृदा को निम्नलिखित आठ वर्गों में विभाजित किया गया है-
  1. जलोढ़ मृदा
  2. काली या रेगुर मृदा
  3. लाल पीली मृदा
  4.  लैटेराइट मृदा
  5. पर्वतीय या वनीय मृदा
  6.  मरुस्थलीय मृदा
  7. लवणीय मृदा
  8. पीट एवं जैव मृदा
Posted on by