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विकासशील देशों की मौद्रिक नीति वहां की राजकोषीय नीति के समान ही उत्पादन को बढ़ावा देने वाली तथा अर्थव्यवस्था में मजबूती लाने वाली होनी चाहिए जिससे कि प्रति व्यक्ति जीडीपी में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ प्रति व्यक्ति उपभोग में भी वृद्धि हो सके|
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राजकोषीय नीतिे वित्त मंत्रालय द्वारा बनाई जाती है जबकि केद्रीय बैंक द्वारा मौद्रिक नीति बनाई जाती है|
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भारत के उद्योगपति चाहते रहे हैं कि विकसित देशों के समान भारत में भी ब्याज दर नीची होनी चाहिए|
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भारत के अर्थशास्त्रियों की प्रतिनिधि संस्था भारतीय आर्थिक परिषद का चार दिवसीय शताब्दी सम्मेलन का आयोजन दिसंबर के अंतिम सप्ताह में आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय गुंटुर के तत्वावधान में किया गया था
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भारतीय आर्थिक परिषद की स्थापना इंडियन इकानॉमिक एसोसिएशन के नाम से 1917 में की गई थी| सम्मेलन में देश-विदेश के 1000 से अधिक अर्थविदों ने हिस्सा लिया| चार दिन के सम्मेलन में पिछले 70 सालों में हुए आर्थिक विकास की दिशा और दशा की समीक्षा के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की संभावनाओं पर चर्चा की गई|
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भारतीय आर्थिक परिषद के 100वें सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ| सी| रंगराजन अपने अध्यक्षीय उद्बोधन हेतु भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक विकास, वृहत आर्थिक नीतियां, वर्तमान सरकार का 2032 , सात वर्षीय रणनीति या तीन वर्षीय कार्य योजना, गरीबी उन्मूलन, रोजगार सृजन आदि में से कोई भी वृहत विषय चुन सकते थे किंतु उन्होंने भारत की मौद्रिक नीति की समोच्चकता विषय को चुना तथा उसमें समय-समय पर हुए बदलाव और उसके परिणामों पर पर चर्चा की|